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असम : 1.5 करोड़ लोगों की नागरिकता का सवाल, कल एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट होगा जारी

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का दूसरा और आखिरी ड्राफ्ट सोमवार, 30 जुलाई को जारी किया जायेगा.

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NewDelhi : असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का दूसरा और आखिरी ड्राफ्ट सोमवार, 30 जुलाई को जारी किया जायेगा. बता दें कि असम में एनआरसी का पहला ड्राफ्ट पिछले साल दिसंबर में जारी किया गया था. खबरों के अनुसार पहले ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किये गये थे. कहा जा रहा है कि फाइनल ड्राफ्ट सामने आने से साफ हो जायेगा कि बाकी बचे 1.5 करोड़ लोग भारत के नागरिक हैं या नहीं.

एनआरसी के राज्य संयोजक प्रतीक हाजेला के अनुसार, फाइनल ड्राफ्ट जारी होने पर आवेदनकर्ता अपने नाम सूची में देख पायेंगे. सूची में आवेदकों का नाम, पता और तस्वीर भी होंगे. जानकारी के अनुसार एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों को शामिल किया गया है, जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं.

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तनाव के मददेनजर जगह-जगह सुरक्षाबल तैनात

राज्य में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी किये जाने को लेकर तनाव के मद़देनजर जगह-जगह सुरक्षाबल तैनात किये गये हैं. राज्य सरकार ने लोगों से संयम बरतने और किसी भी तरह की अफवाह  पर ध्यान नहीं देने की अपील की है.  जान लें कि असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसका एनआरसी है. एनआरसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत अप्रत्यक्ष रूप से देश में गैरकानूनी तौर पर रह विदेशी नागरिकों को खोजने की कोशिश की जाती है. अगर आप असम के नागरिक हैं और देश के दूसरे हिस्से में रह रहे हैं या काम कर रहे हैं, तो आपको एनआरसी में अपना नाम दर्ज कराना जरूरी है.

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अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मामला बहुत बड़ा मुद्दा

जनगणना के आंकड़ों में असम की आबादी में मुसलमानों की संख्या 1961 में 23.3 प्रतिशत थी. जो वर्ष 2011 में 34 प्रतिशत हो गयी है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने असमी, बंगाली या बांग्लादेशी हैं. असम में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मामला बहुत बड़ा मुद्दा रहा है. इसकी वजह अक्सर हिंसक घटनाएं होती रहती हैं. असम के मूल नागरिकों का मानना है कि अवैध रूप से यहां आकर बसे लोग उनका हक मार रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर 80 के दशक में बड़ा आंदोलन हुआ.

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जिसके बाद असम गण परिषद और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ. इसमें तय हुआ कि 1971 तक जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें नागरिकता दी जायेगी और बाकी को निर्वासित किया जायेगा. हालांकि, समझौता आगे नहीं बढ़ा. लंबे वक्त बाद इसपर फिर से काम शुरू हुआ.

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 याचिका में बांग्लादेशियों को खोजने में कोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट ने 31 दिसंबर 2017 को असम के एनआरसी के पहले ड्राफ्ट को रिलीज करने का आदेश दिया था.  बता दें कि जुलाई 2009 में असम लोक निर्माण की तरफ से दायर याचिका में बांग्लादेशियों को खोजने और हटाने में कोर्ट के हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था, उसके बाद से  सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रहा है. पहला ड्राफ्ट जारी होने के आठ महीने बाद दूसरा और फाइनल ड्राफ्ट जारी हो रहा है. इससे पहले एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट 30 जून को जारी होना था, लेकिन  राज्य में बाढ़ के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एनआरसी की रिलीज 30 जुलाई तक रोक दी गयी थी.

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