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असम: NCR का फाइनल ड्राफ्ट जारी, लिस्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं

2,89, 677 लोगों का नाम शामिल, 40 लाख ड्राफ्ट से बाहर

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NewDelhi: सोमवार को असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है. एनआरसी पर जारी मसौदे में राज्य के 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार 677 लोगों को वैध नागरिक मान लिया गया है. जबकि 40 लाख लोगों को अवैध माना गया है. दरअसल, वैध नागरिकता के लिए 3,29,91,384 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें 40,07,707 लोगों को अवैध माना गया. वही एनआरसी ड्राफ्ट को लेकर असम में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए हैं. सीआरपीएफ की 220 कंपनियों को भी तैनात किया गया है. साथ ही कई जिलों में धारा 144 लागू है.

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40 लाख लोगों का क्या होगा ?

एनआरसी के ड्राफ्ट में 40 लाख परिवार को अवैध धोषित किया है. ऐसे में 40 लाख से ज्यादा लोगों का क्या होगा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें बेघर होना पड़ेगा. जिन लोगों को बेघर घोषित किया गया है, उनके बारे में कहा जा रहा है कि इनकी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हुई हो, या फिर वो जो अपनी नागरिकता ठीक से साबित नहीं कर सके हों. हालांकि, एनआरसी के राज्य समन्वयक की ओर से कहा गया है कि यह मसौदा अंतिम लिस्ट नहीं है, जिन लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, इस पर अपनी आपत्ति और शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

एनआरसी के मसौदे को ऑनलाइन और समूचे राज्य के सभी एनआरसी सेवा केन्द्रों (एनएसके) में सुबह दस बजे से पहले प्रकाशित कर दिया गया. हालांकि, इससे पहले इसे दोपहर तक जारी करने की बात हो रही थी. उन्होंने बताया कि एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ होंगे जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं. इधर एनआरसी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने संसद में स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की है. जबकि आरजेडी ने इस पर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.

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राजनाथ सिंह ने दी सफाई

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन का ड्राफ्ट जारी होने के बाद राजनीतिक बवाल भी शुरू हो गया है. फाइनल ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के बाहर होने पर टीएमसी ने राज्यसभा में काफी हंगामा किया, जिसके बाद 12 बजे तक के लिए राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया. टीएमसी सांसदों ने इस लिस्ट को लेकर सवाल किए वहीं, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

सात जिलों में धारा 144

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स के ड्राफ्ट को लेकर राज्यभर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समूचे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. जिला उपायुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों को कड़ी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है. बारपेटा, दरांग, दीमा, हसाओ, सोनितपुर, करीमगंज, गोलाघाट और धुबरी समेत 14 जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई है. किसी भी अप्रिय घटना खासकर अफवाह से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए स्थिति पर बेहद सावधानी से निगरानी बरती जा रही है. सीआरपीएफ की 220 कंपनियों को भी तैनात किया गया है. साथ ही कई जिलों में धारा 144 लागू है.

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लिस्ट में नाम नहीं वालों को फिर मिलेगा मौका

एनआरसी के अधिकारी हाजेला ने कहा कि मसौदा में जिनके नाम नहीं होंगे, उनके दावों की पर्याप्त गुंजाइश होगी. उन्होंने कहा कि अगर वास्तविक नागरिकों के नाम ड्राफ्ट में नहीं हों तो उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है, बल्कि उन्हें (महिला/पुरुष) संबंधित सेवा केन्द्रों में निर्दिष्ट फॉर्म को भरना होगा. ये फॉर्म सात अगस्त से 28 सितंबर के बीच उपलब्ध होंगे और अधिकारियों को उन्हें इसका कारण बताना होगा कि मसौदा में उनके नाम क्यों छूटे. इसके बाद अगले कदम के तहत उन्हें अपने दावे को दर्ज कराने के लिए अन्य निर्दिष्ट फॉर्म भरना होगा, जो 30 अगस्त से 28 सितंबर तक उपलब्ध रहेगा.

घुसपैठियों की होगी पहचान

उल्लेखनीय है कि असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करने और उन्हें निकालने के लिए सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) अभियान चलाया है. दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में गिने जाने वाला यह कार्यक्रम डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट आधार पर है. यानी कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहले पहचान की जाएगी फिर उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा.

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गौरतलब है कि असम में घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए यह अभियान करीब 37 सालों से चल रहा है. 1980 के दशक से ही यहां घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए आंदोलन हो रहे हैं. दरअसल, 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान वहां से पलायन कर लोग भारत भाग आए और यहीं बस गए. इस कारण स्थानीय लोगों और घुसपैठियों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हुईं.

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