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असम  : सेना के रिटायर अधिकारी विदेशी करार दिये गये, नजरबंदी कैंप भेजे गये

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NewDelhi : असम पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में अपनी सेवा दे रहे आर्मी के रिटायर्ड अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर दिया गया है.  नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) में उनका नाम नहीं होने के बाद यह कदम उठाया गया है. मोहम्मद सनाउल्लाह रिटायरमेंट के बाद असम पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बने थे. मोहम्मद सनाउल्लाह (52) दो साल पहले 2017 में आर्मी से ऑनररी कैप्टन के पद से रिटायर हुए थे.

वह असम पुलिस के बॉर्डर विंग में सब इंस्पेक्टर की पोस्ट पर थे. बता दें कि  करगिल की जंग में अपनी सेवाएं दे चुके जवान को फॉरनर्स ट्राइब्यूनल की तरफ से विदेशी करार दिया गया है.   उन्हें असम के कामरुप जिले के कलाहीकाश गांव से गिरफ्तार किया गया.  उन्हें फिलहाल डिटेंशन कैंप में नजरबंद कर रखा जायेगा.

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सिटिजनशिप का सबूत देने में असफल रहे

खबरों के अनुसार सनाउल्लाह ने पिछले साल ही राज्य पुलिस की बॉर्डर विंग जॉइन की थी.  बॉर्डर विंग असम में 25 मार्च 1971 के बाद आये लोगों की पहचान के लिए बनाई गयी  है,  यह तारीख असम के सिटिजनशिप ऐक्ट की कटऑफ तारीख है.  23 मई को यहां के बोको में स्थित फॉरनर्स ट्राइब्यूनल ने आदेश जारी कर बताया कि सनाउल्लाह 25 मार्च 1971 की तारीख से पहले भारत से अपने जुड़ाव का सबूत देने में असफल रहे हैं, वह इस बात का भी सबूत देने में असफल रहे कि वह जन्म से ही भारतीय नागरिक हैं.

इस संबंध में सनाउल्लाह के वकील और रिश्तेदार शाहीदुल इस्लाम ने कहा कि सनाउल्लाह की जन्मतिथि और उनके सेना जॉइन करने की तारीख में अंतर है.  इस्लाम ने बताया, पिछले साल पब्लिश हुए नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप में से नाम गायब होने के बाद ही उन्हें पता चला कि नागरिकता को लेकर उनका केस अभी लंबित है.  इससे पहले उन्हें कभी भी बॉर्डर पुलिस की तरफ से नोटिस नहीं मिला.

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  करगिल युद्ध में शामिल थे

सनाउल्लाह के चचेरे भाई अजमल हक ने बताया, सनाउल्लाह ने 1987 में सेना जॉइन की  थी. वह जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और करगिल युद्ध के समय वहीं पर थे.  2014 में राष्ट्रपति की तरफ से सर्टिफिकेट देकर जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर की पोस्ट पर प्रमोशन मिला था.

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