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असम : आर्मी कोर्ट ने फेक एनकाउंटर में पूर्व मेजर जनरल सहित सात को उम्रकैद की सजा सुनाई

कोलकाता स्थित ईस्टर्न आर्मी कमांड और नयी दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वॉर्टर्स से इसकी पुष्टि होनी बाकी है.  सूत्रों का कहना है कि सजा की आधिकारिक पुष्टि होने में दो-तीन माह लग सकते हैं.

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Guwahati : साल 1994 में असम में पांच युवकों के फेक एनकाउंटर मामले में आर्मी कोर्ट ने सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद की सजा दी है. खबरों के अनुसार जिन्हें सजा मिली है, उनमें एक पूर्व मेजर जनरल, दो कर्नल और चार अन्य सैनिक शामिल हैं. फैसला असम के डिब्रूगढ़ जिले के डिंजन स्थित 2 इन्फैन्ट्री माउंटेन डिविजन में हुए कोर्ट मार्शल में आर्मी कोर्ट ने सुनाया.  कोर्टमार्शल में तिनसुकिया जिले में 24 वर्ष पुराने फर्जी मुठभेड़ पर फैसला आया है   हालांकि कोलकाता स्थित ईस्टर्न आर्मी कमांड और नयी दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वॉर्टर्स से इसकी पुष्टि होनी बाकी है.  सूत्रों का कहना है कि सजा की आधिकारिक पुष्टि होने में दो-तीन माह लग सकते हैं. बता दें कि फैसला ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के कार्यकर्ताओं देबाजीत बिस्वास, अखिल सोनोवाल, प्रबीन सोनोवाल, प्रदीप दत्ता और भाबेन मोरन की हत्या के मामले में आया है.

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 पांचों ऐक्टिविस्ट्स को पंजाब रेजिमेंट की एक यूनिट ने उठाया था

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इन पांचों ऐक्टिविस्ट्स को पंजाब रेजिमेंट की एक यूनिट द्वारा चार अन्य लोगों के साथ 14 फरवरी से 19 फरवरी 1994 के बीच तिनसुकिया जिले की अलग-अलग जगहों से उठाया गया था. जानकारी के अनुसार जिन सात लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें मेजर जनरल एके लाल, कर्नल थॉमस मैथ्यू, कर्नल आरएस सिबिरेन, जूनियर कमिशंड ऑफिसर्स और नॉनकमिशंड ऑफिसर्स दिलीप सिंह, जगदेव सिंह, अलबिंदर सिंह और शिवेंदर सिंह शामिल हैं.  जानकारी दी गयी है कि दोषी सैन्यकर्मी सजा के फैसले के खिलाफ आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं. बताया गया है कि  मेजर जनरल लाल को 2007 में लेह स्थित 3 इन्फैंट्री डिविजन के कमांडर पद से, एक महिला अधिकारी द्वारा उनके खिलाफ योग सिखाने के बहाने अनुचित व्यवहार और बदसलूकी का आरोप लगाने के बाद हटा दिया गया थाइस क्रममें 2010 में उन्हें कोर्ट मार्शल के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल ने उनकी रिटायरमेंट बेनिफिट्स बहाल कर दी थी.

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23 फरवरी 1994 को डांगरी फेक एनकाउंटर में मार दिये जाने का आरोप

खबरों के अनुसार तलप टी एस्टेट के असम फ्रंटियर टी लिमिटेड के जनरल मैनेजर रामेश्वर सिंह की उल्फा उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी.  इसके बाद सेना ने ढोला आर्मी कैंप में 9 लोगों को हिरासत में लिया था.  इनमें से पांच लोग 23 फरवरी 1994 को  डांगरी फेक एनकाउंटर में मार दिये गये.   AASU के तत्कालीन उपाध्यक्ष और वर्तमान में भाजपा नेता जगदीश भुयान ने इस फेक एनकाउंटर के खिलाफ अकेले गुवाहाटी हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद इस मामले की सीबीआई जांच हुई.  बता दें कि असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल एक समय AASU के अध्यक्ष रह चुके हैं.

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