न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

झामुमो की हैसियत नहीं कि अमित शाह से सवाल पूछे : प्रतुल शाहदेव

463

Ranchi : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के उस बयान पर पलटवार किया है. जिसमें उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से 15 प्रश्न पूछे थे. श्री शाहदेव ने कहा कि झामुमो के महासचिव कोई अधिकार नहीं है कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से प्रश्न पूछे. उनके द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का जवाब देने के लिए किसी भी सार्वजनिक मंच पर भाजपा का एक साधारण कार्यकर्ता ही सक्षम है. श्री शाहदेव ने झामुमो से जानना चाहा कि उन्होंने अभी तक भाजपा के द्वारा जेएमएम के कार्यकारी अध्‍यक्ष हेमंत सोरेन से पूछे गए 4 प्रश्नों का जवाब क्यों नहीं दिया. जबकि अब 15 दिन से ज्यादा बीत गये.

 ये है चार प्रश्‍न

क्या हेमंत सोरेन ने सीएनटी-एसपीटी का उल्लंघन करके जमीन खरीदा है ?

हेमंत सोरेन अगर गोला के रहने वाले हैं तो उन्होंने रांची, रामगढ़, गिरिडीह, दुमका आदि जगहों पर संपत्ति कैसे खरीदी ?

रांची में बना सोहराई भवन क्या सीएनटी-एसपीटी का उल्लंघन करके नहीं बना है ?

गरीब राजू उरांव से क्या सोरेन परिवार ने करोड़ों की जमीन को लाखों में नहीं खरीदी ?

इसके अतिरिक्त भाजपा तीन अन्य मुद्दों पर हेमंत सोरेन का रूख जानना चाहती है जिस पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है.

पत्थलगढ़ी की आड़ में राष्ट्र विरोधी शक्तियों ने जिस तरीके से खूंटी को आशांत करने का प्रयास किया था उस पर आपकी चुप्पी संदेहास्पद है ?

हेमंत जी, मिशनरीज ऑफ चैरिटी के द्वारा बच्चों को बेचने के रैकेट का पर्दाफाश हुआ. जिसमें ऐसी संस्थाओं की असलियत सामने आई. इस मुद्दे पर भी आप की पार्टी चुप रही.

हजारों वर्षों से अपनी परंपरा को सहेज कर रखने वाले आदिवासी समूह के लिए जब सरकार अनुसूचित जनजाति के लिए जो आरक्षण है, उसका शत प्रतिशत लाभ देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है तो इस मुद्दे पर भी आपने चुप्पी साध रखी है.

श्री शाहदेव ने  हेमंत सोरेन पर कटाक्ष करते हुए कहा की उनकी खामोशी बयां करती है कि इन मुद्दों पर या तो वो राष्ट्र विरोधी ताकतों के साथ खड़े हैं या फिर मिशन के इशारों पर चुप है.

श्री शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन ने ऐसे ही मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास से 12 प्रश्न किए थे. भाजपा ने उसी दिन सारे प्रश्नों का उत्तर दे दिया था. लेकिन हेमंत सोरेन आज भी अपने प्रश्नों का उत्तर देने से भाग रहे हैं .बात साफ है पूरी की पूरी दाल ही काली है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: