West Bengal

ASANSOL: ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा प्रवासी मजदूरों के जाने का असर

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  • मांग के बाद भी गाड़ियों की आपूर्ति संभव नहीं
  • भारी जीएसटी की दर से भी बढ़ी परेशानी
  • ब्याज दर में कमी का फायदा नहीं दे रहे हैं बैंक वाले

Asansol: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर की परेशानी काफी बढ़ गयी है. एक तो बिक्री में कमी आयी है और अगर बिक्री है तो गाड़ियों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से जो बुकिंग है वह भी ऑटोमोबाइल डीलर अपने ग्राहकों को नहीं दे पा रहे हैं. सरकार को तत्काल इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए जिससे कि ऑटोमोबाइल सेक्टर को कुछ राहत मिल सके.

यह बातें फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन फाडा के रीजनल डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने कही. वह शुक्रवार को एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे. विषय था कोविड-19 के दौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर की समस्या. इस वेबिनार में सिलीगुड़ी के जाने-माने ऑटोमोबाइल डीलर शामिल हुए.

बीके ऑटो की ओर से निर्मल गर्ग, खोखन मोटर्स से गोपाल मजूमदार, ओएसएल ऑटोमोटिव्स से पवन गोयल, केसंस होंडा के प्रदीप अग्रवाल, बजाज ऑटो के राहुल लाखोटिया, यामाहा मोटर्स के अंकुर मजूमदार और आनंद हीरो के सुमित गोयल ने भी इस वेबिनार को संबोधित किया.

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सीधा असर उत्पादन पर

इनलोगों ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के सामने आ रही समस्याओं के बारे में बताया. वेबिनार का संचालन फाडा के रीजनल डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ही कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों की कमी के कारण समस्या काफी बढ़ गयी है. कोरोना के कारण लॉकडाउन के समय काफी प्रवासी मजदूर अपने अपने घर लौट गये हैं. अब इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है.

ऐसा नहीं है कि गाड़ियों की मांग में काफी कमी आ गयी है. लग्जरी गाड़ियों की माग भले ही कम हो, लेकिन छोटी गाड़ियों की माग बनी हुई है. शॉर्ट टर्म डिमांड में बढ़ोत्तरी हुई है. लेकिन कंपनियां गाड़ियों की आपूर्ति ही नहीं कर पा रही हैं क्योंकि उनके सामने अब मजदूरों की समस्या आ रही है. काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे.

जब गाड़ी बनेगी नहीं तो डीलरों के पास आयेगी कैसे. इसके कारण बुकिंग होने के बाद भी ग्राहकों को गाड़ी की डिलीवरी नहीं दे पा रहे हैं. उन्होंने जीएसटी की दर में भी कमी की मांग सरकार से की.

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सबसे अधिक जीएसटी गाड़ियों पर

उन्होंने कहा कि जीएसटी सबसे अधिक गाड़ियों पर लगायी गयी है जिससे गाड़ी काफी महंगी हो जाती हैं. इसके कारण भी गाड़ियों की माग में कमी आयी है. कई तरह की और भी समस्याएं हैं, जिसे ऑटो डीलर फेस कर रहे हैं. राज्य और केंद्र सरकार को तत्काल इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में पहल करनी चाहिए.

अग्रवाल ने आगे कहा कि बैंकों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है. बीच-बीच में बैंक वाले ब्याज दर तो कम करते हैं लेकिन इसका सीधा लाभ ऑटोमोबाइल डीलर को नहीं दे रहे हैं जिसके कारण काफी ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है. लोन लेकर गाड़ी खरीदने वाले कम हो रहे हैं. उन्होंने तत्काल ऑटोमोबाइल सेक्टर को एमएसएमई में भी शामिल करने की माग भी.

वेबिनार में अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि गाड़ियों की माग में 20 फीसदी की कमी आयी है. कोरोना संकट खत्म होने के बाद गाड़ियों की माग फिर से बढ़ेगी. सरकार को ऑटोमोबाइल सेक्टर की मदद में आगे आना चाहिए. जीएसटी की दर कम हो और बैंक के ब्याज दर में भी कटौती होनी चाहिए. यदि जीएसटी की दर पर कमी हो तो दुपहिया वाहनों की माग में काफी बढ़ोतरी होगी. इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफी लाभ होगा.

सभी वक्ताओं ने माना कि कोरोना काल में ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी जॉब की कमी हुई है.

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