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बचपन से हाफ पैंट, संघ और हिन्दू… हिन्दू… करता रहा, जैसे ही सरकार बनी, रघुवर-रघुवर करने को कहा जाने लगा!

RSS के करीबी और चुनाव में BJP के आइटी सेल के कनवेनर ने दिया “इस बार झामुमो सरकार” का नारा

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AKSHAY KUMAR JHA

Ranchi: आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिसने बचपन से ही हाफ पैंट पहनकर आरएसएस की शाखा में हाजिरी बनायी, होश संभालाने के बाद बीजेपी के हर आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया, अपनी पहचान ही बीजेपी बना ली, लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पत्रकारिता छोड़ कर बीजेपी के आइटी सेल के लिए काम किया,  प्रदेश संयोजक बने, वही शख्स आज “इस बार झामुमो सरकार” का नारा दे रहा है. बात हो रही है शिशिर ठाकुर की. इन्होंने खुल्लम-खुल्ला अपने फेसबुक अकाउंट में जो लिखा है, उसने युवा बीजेपी सदस्यों के बीच चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है. सभी जानना चाह रहे हैं कि आखिर ठाकुर ऐसा कर क्यों रहे हैं.

ठाकुर ने क्या लिखा है अपने फेसबुक वॉल पर

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सुनिए “इस बार झामुमो सरकार” के लिए मैं काम करूंगा. नहीं, ज्वाइन नहीं किया है ना करूंगा. इसको कहते हैं स्वतंत्र स्पोर्ट. देखए अब डर तो रहा नहीं. फरारी काट ली. थाना और कोर्ट दौड़ रहे हैं, बाकी क्या. अब इस ब्राह्मण बालक को जेल भेजेगी हिंदूवादी पार्टी भाजपा?

देखिए आपको भी कहता हूं. बचपन से हाफ पैंट और संघ, हिन्दू… हिन्दू… हिन्दू… करता रहा.  जैसे ही सरकार आयी तो रघुवर दास-रघुवर दास करने को कहा जाने लगा. अपनी सरकार जो करे सब सही. चाहे वो घोटाला या अनैतिक क्यों न हो. मेरा मोह भंग हो चुका है.

शिशिर ठाकुर की फेसबुक वॉल.

बेवकूफी थी विद्यर्थि परिषद का जेवियर में हंगामा, मुंडा जी की सरकार में आंदोलन और भाजपा के दो चुनाव में बिना पार्टी से एक पैसा लिए सोशल मीडिया संभालना. लेकिन पार्टी में इसका काम नहीं. यहां दो लोग टिकते हैं,  जो अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट का गला घोंट दे, या दूसरा वो जो सूती का झोला टांग कर आये थे और अब पार्टी के पैसे से करोड़पति हैं. संदर्भ चंदा लाने वाले. राम मंदिर, रोबर्ट वाड्रा तो हम करवा के रहेंगे पर झारखंड में तो सरकार के बारे में बोलने से झूठा केस हो जाता है. नग्नता की पराकाष्ठा है. कार्यकर्ता के साथ गलत हो, तो तल्वे चाटने वाले उसी को बाहर फेंकते हैं. मुझे पहले निलंबित किया, फिर निष्कासित किया. फिर केस कर घर पर रेड करवाया. किसी ने मुझसे बात तक नहीं की. क्योंकि सरकार तल्वे चाटने वाले को ठेका, स्किल डेवलपमेंट और NGO के नाम पर करोड़ों रुपया दे चुकी है. मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि बाकी पार्टी में ऐसा नहीं होता. लेकिन वो संघ का स्वांग नहीं रचते. बेवकूफ नहीं बनाते. संघ पर बात आयी तो जिनको इसपर आस्था है उनको बता दूं – जब मैं सरकार के अनैतिक कृत पर लिख रहा था तब संघ के एक सबसे मजबूत पदाधिकारी (राज्य) मेरी पीठ थपथपाते नहीं थकते थे. जैसे ही केस हुआ संघ के उस तोप ने मेरा फोन तक उठाना बंद कर दिया, तो किसकी कितनी औकात है आप समझ लो. और जो संगठन खुद मराठी और गैर मराठी में विभाजित हो वो क्या अखंड भारत देगा. बहरहाल, मुझपर केस हुआ था क्योंकि मैं मुख्यमंत्री का ब्राह्मणों पर बयान का विरोध कर रहा था. एक संघ के बड़े नेता ने मुझे समझाया था कि हम संघियो की मानसिकता 80 साल में विपक्ष में बैठने वाली हो गयी है. उस वक्त मैं नहीं समझा था अब समझा कि राज्य और कार्यकर्ता को खुश रखना है तो भाजपा को विपक्ष में ही बैठाना होगा. तो लो भाई भाजपा झारखड को चैलेंज, जो लाखों रुपया लगा के सोशल मीडिया की बैंड पार्टी बनायी है, लगाओ ज़ोर. मैं अपने एक मोबाइल से सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी पर काम करूंगा. देखते हैं ज़्यादा प्रचार-प्रसार कौन कर पाता है. वैसे मुझे पता है कि मुझे जेल भिजवाने में आपको जरा हिचक नहीं होगी. क्योंकि मैं उस जाति से हूं, जिसको कुचलने से आपको शांति मिलती है. लेकिन फेयर प्ले होगा ऐसी उम्मीद है. चलो लग जाओ काम पर. समापन से पहले एक बात, हेमंत सोरेन वर्तमान मुख्यमंत्री से कई गुना अच्छे शाशक थे. और ये सपोर्ट फिर से वैसे शासन. उम्मीद है ये पुनः भाजपा से गठबंधन की गलत्ती नही दोहरायेंगे. 

फेसबुक पर लिखने की वजह से हुआ था केस

गौरतलब है कि शिशिर ठाकुर पर फेसबुक पर सरकार विरोधी बातों को लिखने पर केस हुआ था. इनपर 66 (ए) और अन्य कई धाराओं में केस दर्ज हुआ था. जिसके बाद वो जमानत पर बाहर हैं.

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