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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 पूरी तरहअस्थायी  है : संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप

NewDelhi : कश्मीर मामले में  Article 370 व अनुच्छेद 35A के बारे में संविधान विशेषज्ञों की राय जानना जरूरी है.  संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 पूरी तरह से अस्थायी है. इस बात का जिक्र अनुच्छेद में ही किया गया है.उनके अनुसार  Article 370 को जहां तक हटाने का सवाल है, तो इसको लेकर संविधान में दो बातें कहीं गयी है.

पहली बात यह कि अनुच्छेद 370 को जम्मू कश्मीर विधानसभा की सहमति से संसद हटा सकती है, जबकि दूसरा प्रावधान है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद दो तिहाई बहुमत से इसको समाप्त कर सकती है. सुभाष कश्यप का कहना है कि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान के किसी भी अनुच्छेद में संशोधन करने या उसको हटाने का अधिकार देती है. ये ही अनुच्छेद 370 के बारे में कई गुत्थियां सुलझाता है.

डॉ भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान में Article  370 के पक्ष में नहीं थे

संविधान विशेषज्ञ डीके दुबे के अनुसार अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य के लिए विशेष उपबंध नहीं करता है बल्कि यह राज्य के लिए अस्थायी उपबंध करता है. इस अनुच्छेद को भारतीय संसद दो तिहाई बहुमत से खत्म कर सकती है.  डीके दुबे कहते हैं कि   डॉ भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान में Article  370 के पक्ष में नहीं थे. इस अनुच्छेद को संविधान में जोड़ने का प्रस्ताव शेख अब्दुल्ला ने रखा था और यह अनुच्छेद मामूली चर्चा के बाद संविधान में जोड़ दिया गया.

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इस Article  को लेकर संसद में गंभीरता से चर्चा भी नहीं की गयी थी. डीके दुबे का कहना है कि अंबेडकर ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर की पॉलिसी को लेकर खुश नहीं है.   भारतीय संविधान के Article 35A को प्रेसिडेंशियल ऑर्डर के जरिए जोड़ा गया था. जब इस प्रेसिडेंशियल ऑर्डर को जारी किया गया उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे और राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे. कश्मीर जम्मू कश्मीर की समस्या की असली जड़ अनुच्छेद 35A ही है. प्रेसीडेंशियल ऑर्डर के द्वारा इसको समाप्त भी किया जा सकता है.

अनुच्छेद 35A और अनुच्छेद 370 की वैधानिकता को चुनौती

भारतीय संविधान के Article 370 में जम्मू कश्मीर राज्य के लिए अस्थायी उपबंध किया गया है. जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष उपबंध का नहीं, बल्कि अस्थाई उपबंध का इस्तेमाल किया गया है.9. इसके बाद अनुच्छेद 370 के तहत कॉन्स्टिट्यूशन (एप्लीकेशन टू जम्मू कश्मीर) ऑर्डर 1954 जारी करके संविधान में Article  35A को संविधान में जोड़ा गया. साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में एक एनजीओ ने याचिका दायर कर इस अनुच्छेद को एक भारत की भावना के खिलाफ और अलगाववाद को बढ़ावा देने वाला प्रावधान बताया. इस याचिका में अनुच्छेद 35A और अनुच्छेद 370 की वैधानिकता को चुनौती दी गयी थी.

याचिका में तर्क दिया गया कि आजादी के बाद देश का संविधान बनाने के लिए जो संविधान सभा बनी थी उसमें जम्मू-कश्मीर के चार प्रतिनिधि भी शामिल थे. साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य को कभी भी स्पेशल स्टैटस नहीं दिया गया.  तर्क दिया गया कि 35-ए एक अस्थायी उपबंध था जिसे राज्य में हालात को उस समय स्थिर करने के लिए जोड़ा गया था. इस अनुच्छेद को संविधान के निर्माताओं ने नहीं बनाया.

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