JharkhandLead NewsRanchiTOP SLIDER

जिस दुधमुंही बच्ची को गोद में लेकर अर्जुन मुंडा ने की मुख्यमंत्री लाडली योजना की शुरुआत, उसके खाते में किसी सरकार ने नहीं डाली फूटी कौड़ी  

Akshay Kumar Jha

Ranchi: वो 2011 का 15 नवंबर का दिन था. ठीक आज के दिन की ही तरह मोरहाबादी महंगे टेंट से सजा हुआ था. जनरेटर और बाकी व्यवस्था पर करोड़ों खर्च हुए थे. आदिवासी दिवस का उत्सव मनाया जा रहा है. 2011 के 15 नवंबर को झारखंड का स्थापना दिवस मनाया जा रहा था. मोरहाबादी खचाखच भीड़ से अटा पड़ा था. मंच पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, डिप्टी सीएम हेमंत सोरेन, डिप्टी सीएम सुदेश महतो और उस वक्त की महिला कल्याण विकास की मंत्री विमला प्रधान मुख्ममंत्री लाडली योजना की शुरुआत कर रहीं थीं. यूं तो योजना फीता काट कर भी शुरू की जा सकती थी. लेकिन आयोजन को थोड़ा ह्यूमन एंगल दिया गया. एक छह महीने की दुधमुही बच्ची का चयन किया गया. नाम था नेहा कुमारी मुंडा. पिता सुकरा मुंडा और मां ज्योती मुंडा की बच्ची को खुद तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा गोद में उठाए हुए थे. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की लाइव कवरेज के अलावा प्रिंट मीडिया के चमकते फ्लैश के बीच योजना की शुरुआत की गयी. दूसरे दिन अखबारों में पहले पन्ने पर छपा “झूमी बिटिया, झूमा झारखंड.” लेकिन ऐसा सिर्फ दिखावे के लिए हो रहा था. जिस बच्ची को गोद में लेकर योजना की शुरुआत की गयी, वो ना तो उस दिन और ना ही उस दिन के बाद कभी झूमी. हां गरीबी और बेबसी की वजह से उसके घरवालों को चक्कर कभी-कभी जरूर आ जाता है.

डाकखाने में अकाउंट खुला, लेकिन आजतक नहीं आयी फूटी कौड़ी

Sanjeevani

बच्ची को गोद में लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और तत्कालीन डिप्टी सीएम हेमंत सोरेन ने योजना की शुरुआत की. बकायदा आरएमसीएच (उस वक्त) के डाकखाने में अकाउंट खोला गया. अकाउंट नंबर 110570087 का पासबुक घरवालों को दिया गया. लेकिन 11 साल बीतने को है, अभी तक बच्ची के अकाउंट में एक भी रुपया नहीं आया. घरवालों की तरफ से उस खाते में 100 रुपए जमा कराए गए. आज भी उसके खाते में सिर्फ 100 रुपए ही जमा हैं. बच्ची के पिता सुकरा मुंडा ने न्यूज विंग से बात की. उन्होंने कहा कि इस योजना की राशि लेने के लिए मैं किसके पास जाऊं. क्या करू, इसका आइडिया उसे नहीं है. लेकिन वो सरकार से गुहार लगाता है कि उसकी बच्ची को उसका हक मिले. 2011 के बाद से मुख्यमंत्री लाडली योजना के तहत मिलने वाली राशि उसके खाते में डाली जाए. ताकि वो अपनी बच्ची का भविष्य बेहतर बना सके. सुकरा मुंडा ने बताया कि कुछ दिनों पहले उसने आंगनबाड़ी वालों को इस मामले के बारे बताया था. लेकिन उनलोगों ने भी उससे पैसे की डिमांड की. उसका कहना है कि वो एक दैनिक मजदूर है. लेबर का काम करता है. महीने में शायद ही 15 दिन काम मिलता है. घर के हालात काफी खराब हैं. ऐसे में वो कैसे किसी को पैसा दे सकता है.

 

क्या है मुख्यमंत्री लाडली योजना

-बीपीएल परिवार में जन्म लेने वाली दो लड़कियों के डाक खाते में कुल तीस हजार प्रति वर्ष ₹6000 की दर से 5 साल साल तक जमा होगी.

-क्लास 6 में प्रवेश करने पर ₹2000 एकमुश्त लड़की के खाते में डाली जाएगी.

-क्लास 9 में प्रवेश करने पर लड़की को एकमुश्त ₹4000 मिलते.

-11वीं कक्षा में प्रवेश करने पर लड़की को 7500 रुपए एकमुश्त.

-11वीं और 12वीं कक्षा में उसे 200 रुपए प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति दी जाती.

-21 साल की उम्र होने और 12वीं परीक्षा में शामिल होने वाली लड़की को एकमुश्त ₹60000.

-16 साल के बाद लड़की के विवाह के समय भी लड़की के आवेदन पर इस राशि का भुगतान.

Related Articles

Back to top button