Opinion

क्या अपनी विफलता को छिपाने के लिये देशभक्ति का जोश बढ़ाने में जुट गये हैं दुनिया भर के सत्ताधीश

Surjit Singh

Jharkhand Rai

–    अमेरिकाः चीन के कारण हमारे यहां कोरोना संकट आया. चीन ने धोखा दिया. उसे सजा भुगतनी पड़ेगी.
–    तिब्बतः हम अपनी स्वतंत्रता को हर हाल में कायम रखेंगे. चीन हमारी संप्रभुता में दखल नहीं दे सकता.
–    भारतः पीओके का हिस्सा भारत का अभिन्न अंग है. हम इसे लेकर रहेंगे. मौसम की जानकारी भी जारी की.
–    पाकिस्तानः भारत कभी भी पाकिस्तान पर सशस्त्र हमला कर सकता है.
–    नेपालः भारत से हमारे यहां कोरोना फैल रहा है. नेपाल ने भारत के हिस्से को भी अपने नक्शे में दिखाया.
–    चीनः चीनी सैनिक सीमा पर लगातार गड़बड़ी करके भारतीय सेना को उकसाने का काम करता दिख रहा है.

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कई अन्य देश भी अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते को खराब करने में लग गये हैं.
यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है. दुनिया भर में लॉकडाउन की स्थिति है. और तमाम देशों की कथित आर्थिक संपन्नता ताश के पत्ते की तरह गिरती जा रही है. कोरोना वायरस लगातार लोगों को संक्रमित कर रहा है. लोग मर रहे हैं. लोग बेरोजगार होते जा रहे हैं और भुखमरी की तरफ बढ़ रहे हैं.

Samford

फिर ये अचानक से युद्ध का उन्माद क्यों फैल रहा है. वह भी दुनिया के कई देशों के बीच.

दरअसल, कोरोना संकट ने दुनिया भर के सत्तीधीशों की नींद उड़ा दी है. सत्ताधीशों ने अपने नागरिकों के सामने जो आडंबर फैला रखे थे, उस पर से पर्दा उतर गया है. आम नागरिकों को समझ में आने लगा है, सरकारें कितनी झूठी, कागजी और फरेबी है. इवेंट्स की चकाचौंध में जो चीजें नजर नहीं आ रही थी, अब खुली आंखों से दिख रही है.

सूट-बूट पहने जिस अर्थव्यवस्था को हम बाहुबली समझ रहे थे, सूट-बूट उतरने के बाद अब कंकाल नजर आ रही है. दरअसल, वह पहले भी कंकाल ही थी, जिसे सूट-बूट ने ढंक रखा था. दुनिया भर की अधिकांश सरकारें इस संकट काल में हर मोर्चे पर विफल नजर आ रही है. हमारा देश भी इसमें अपवाद नहीं है.

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तो क्यों दुनिया भर की सरकारें उन्माद की भाषा का इस्तेमाल करने लगी है. इसकी वजह अपने-अपने नागरिकों में देशभक्ति का जोश बढ़ाना है. दुनिया भर के शासकों को अपनी विफलता को छिपाने का अब यही रास्ता नजर आ रहा है. देशभक्ति व राष्ट्रवाद के नाम पर नागरिकों का जोश बढ़ाओ.

कोरोना संकट जैसे-जैसे बढ़ेगा, वैसे-वैसे सरकारों का कागजी किला ध्वस्त होगा. सत्ताधीशों का झूठ, फरेब सामने आयेगा. ये वैसे-वैसे ही देशभक्ति व राष्ट्रवाद की भावना को भड़कायेंगे, ताकि लोग उनकी विफलता को भूल जाये.

अमेरिका के राष्ट्रपति कह रहे हैः अमेरिका खतरे में है. क्योंकि चीन है. भारत के रहनूमा कह रहे हैः पाकिस्तान सुधर नहीं रहा. तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि भारत कभी भी हमला कर सकता है. इसी तरह नेपाल कह रहा हैः नेपाल खतरे में है. खतरा भारत से है.

यानी सबकी भाषा एक ही जैसी. ऐसे लगता है दुनिया भर की सरकारों का यह कॉमन पैटर्न बन गया है. पर, इसके खतरे बहुत हैं. दुनिया भर की सरकारें भी जानती है. फिर भी उन्माद वाली भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सबसे बड़ा खतरा है अगर, किसी सनकी शासक ने अपनी सनक दिखा दी तो दुनिया को युद्ध का सामना करना पड़ सकता है. इसलिये सावधान रहने की जरुरत है.
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