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अधिकारियों की मनमानीः चतरा में 8-12 जनवरी तक संविदा कर्मी को दिया गया #DDC और #DRDA का प्रभार

Ranchi: जिला स्तर पर अधिकारी नियमों को ताक पर रख कर काम कर रहे है. चतरा जिला से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया. जहां उप विकास आयुक्त जैसे पद का कार्यभार संविदा कर्मी को दे दिया गया. वो भी लगभग एक सप्ताह के लिये.

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सूत्रों से जानकारी मिली है कि पिछले दिनों जिला में उप विकास आयुक्त और जिला ग्रामीण विकास अभिकरण निदेशक का कार्यभार संविदा कर्मी फनींद्र गुप्ता को दिया गया था. फनींद्र गुप्ता संविदा पर कार्यरत है. और जिला में परियोजना पदाधिकारी के पद पर हैं.

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राज्य में शायद यह पहली बार हुआ है जब संविदा कर्मी को प्रभार में आइएएस पद मिला हो. बात दें उप विकास आयुक्त मुरली मनोहर प्रसाद छह जनवरी से 11 जनवरी तक छुट्टी पर गये.

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इस दौरान उन्होंने अपना कार्यभार जिला ग्रामीण विकास अभिकरण डीआरडीए निदेशक अरूण कुमार एक्का को दिया.

जबकि आठ जनवरी से 12 जनवरी तक खुद ग्रामीण विकास अभिकरण निदेशक अरूण कुमार एक्का भी छुट्टी पर चले गये. इस दौरान एक्का ने डीआरडीए और डीडीसी का कार्यभार फनींद्र गुप्ता को दे दिया. जो संविदा कर्मी है.

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महत्वपूर्ण पद होते हैं डीडीसी और डीआरडीए

किसी भी जिले के महत्वपूर्ण पदों में उप विकास आयुक्त और ग्रामीण विकास अभिकरण निदेशक के पद होते हैं. जहां डीडीसी जिला के विकास संबधी महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हैं. तो वहीं ग्रामीण विकास अभिकरण के निदेशक ग्रामीण विकास संबधी कार्यों को देखते हैं.

ऐसे में दो महत्वपूर्ण पदों का संविदा कर्मी को प्रभार देना उचित नहीं है. इस संबध में डीडीसी मुरली मनोहर प्रसाद से बात करने पर कहा कि उन्होंने प्रभार डीआरडीए को दिया था.

वहीं डीआरडीए अरूण कुमार एक्का ने कहा कि उन्होंने डीडीसी और डीआरडीए का प्रभार संविदा कर्मी फणिंद्र गुप्ता को दिया. लेकिन डीसी ने बाद में डीडीसी और डीआरडीए का पदभार एलआरडीसी को दे दिया.

नियम संगत नहीं है संविदा कर्मी को प्रभार देना

अन्य जिलों के अधिकारियों से ही जानकारी मिली कि किसी संविदा कर्मी को डीडीसी जैसे पद का प्रभार देना नियम संगत नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक, संविदा कर्मी इन पदों के लिये ऑथाराइजड ही नहीं है.

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