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टेबल-कुर्सी की खरीद में पंचायतों की मनमानी, वित्तीय नियमावली को किया जा रहा है दरकिनार

Amit Jha

Ranchi/Dhanbad: पंचायतों में टेंडर प्रक्रियाओं के शर्तों का मखौल बनाया जा रहा है. पंयायत भवन के लिए टेबल-कुर्सी  और अन्य जरूरी सामानों की जरूरत पंचायतों को होती है. इसके लिए वे अपने स्तर से खरीदारी कर सकती हैं. पर वित्तीय नियमावली 2010 में निर्धारित प्रावधानों को ठीक से फॉलो नहीं किया जा रहा है.

इसका उल्लंघन हुआ है. नियमों के मुताबिक डेढ़ लाख रुपये से उपर के सामान की खरीदारी में अखबारों में विज्ञापन जारी करना जरूरी है. पर पंचायतें मनमाने तरीके से अपने पसंदीदा वेंडरों, एजेंसियों से कुर्सी, टेबल जैसे सामग्रियों की खरीदारी कर रही हैं.

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क्या कहता है नियम

फरवरी 2011 में वित्त विभाग ने एक आदेश जारी किया था. इसमें कहा गया है कि सरकारी विभागों या विभागीय हेड को डेढ़ लाख रुपये तक की निविदा के लिए अखबारों में टेंडर जारी करना जरुरी नहीं है. इतने पैसे तक के काम के लिए नोटिस बोर्ड पर निविदा प्रकाशित करना काफी है. 15,000 रुपये तक के सामान या काम के लिए कोटोशन मंगाकर आवश्यक प्रक्रियाओं को फॉलो करके काम किया जायेगा.

एक ही कंपनी से तीन पंचायतों ने की खरीदारी

धनबाद की तोपचांची प्रखंड की तीन पंचायतों को देखें. घुंघसा, प्रधानखंता और ढांगी. इन पंचायतों में पंचायत सचिवालय के लिए टेबल-कुर्सी की खरीद 14वें वित्त के पैसे से की गयी. ढांगी और प्रधानखंता और ने इसके लिए बराबर बराबर 4,25,600 रुपये खर्च किये. संयोग से दोनों ने 11 अगस्त को ही इसके लिए कंपनी संस्थान को पैसे रिलीज किये (प्रधानखंता का वाउचर नं औऱ डेट- FFC/2020-21/P/5, ढांगी का वाउचर नं औऱ डेट FFC/2020-21/P/8).

घुंघसा ने इस काम के लिए 3,51,500 रुपये 3 अगस्त को (वाउचर नं औऱ डेट FFC/2020-21/P/11) जारी किये. दिलचस्प यह है कि तीनों पंचायतों ने पैराडाइज ट्रेडर्स एजेंसी से ही सामान की खरीदारी करने में रुचि दिखायी. जानकारी के मुताबिक पैराडाइज ट्रेडर्स देवघर की एजेंसी है. यानि धनबाद की पंचायतें टेबल-कुर्सी  की खरीद के लिए देवघर तक गयीं.

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क्या कहते हैं जिम्मेदार

घुंघसा मुखिया श्रीकांत मंडल के अनुसार 14वें वित्त की राशि में 10 प्रतिशत पैसे कंटीजेंसी फंड के लिए थे. इससे कंप्यूटर ऑपरेटर, जेइ का मानदेय देने के अलावे जेरॉक्स मशीन की खरीद, ऑफिस के लिए स्टेशनरी की खरीद वगैरह की जाती थी.

पंचायत अपनी जरूरतों के लिए इस फंड से 5 लाख तक का सामान क्रय समिति के जरिये खरीद सकती है. इसमें मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव सदस्य होते हैं. समिति ना हो तो कार्यकारिणी समिति की बैठक करके 3 कोटेशन लेकर सामानों की खरीदारी की जायेगी. उन्होंने इसी आधार पर टेबल कुर्सियां खरीदी हैं.

डेढ़ लाख से उपर के लिए बनती है स्कीम

नियमानुसार डेढ़ लाख रुपये तक का काम पंचायतें आसानी से कर सकती हैं. पर इसके उपर 5 लाख तक के लिए लाभुक समिति फैसला लेकर अखबारों में विज्ञापन जारी करेगी. कुर्सी टेबल की खरीद किसी योजना का हिस्सा नहीं है, ना ही आधारभूत संरचना के निर्माण या विकास से जुड़ा काम है. ऐसे में अगर डेढ़ लाख से उपर का काम होगा, तो अखबारों में सूचना जारी करनी होगी. इससे नीचे के लिए लाभुक समिति की जरूरत नहीं.

क्या कहते हैं बीडीओ

तोपचांची (धनबाद) बीडीओ क्रिस्टोफर बेसरा ने न्यूजविंग से कहा कि वित्तीय नियमावली का पालन पंचायतों को करना होगा. अगर किसी पंचायत में इसके उल्लंघन की घटना हुई है तो वह गंभीर मसला है. मामले का पता लगाकर इस पर कार्रवाई की जायेगी.

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