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BAU में शिक्षकों के 800 पद स्वीकृत-कार्यरत मात्र 250, कैसे होगा कृषि तकनीक का इजाद

बीएयू में 70 फीसदी शिक्षकों कमी, कई विभागों पर लग सकता है ताला

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Satya Prakash Prasad

Ranchi: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में कृषि वैज्ञानिकों (शिक्षकों) का घोर अभाव है. शिक्षकों की कमी के कारण यहां कृषि तकनीक पर कोई शोध या नया तकनीक इजाद नहीं की जा रही है. बीएयू में केवल किसानों के लिए मेला आयोजन कर उन्हें सरकारी बीज या खाद बांटने का काम प्रशासन की ओर से किया जा रहा है. बीएयू में शिक्षकों का कुल स्वीकृत पद 800 है, जबकि इन पदों पर के अनुरूप वर्तमान में केवल 250 शिक्षक ही बच गये हैं.

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शिक्षकों की कमी के कारण कुछ वर्ष पहले वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया (वीसीआइ) ने बीएयू को वेटनरी कॉलेज की मान्यता लगभग तीन सालों के लिए रद्द कर दी थी. काफी मशक्कत के बाद बीएयू प्रशासन ने साल 2015 में वीसीआई से मान्यता ली. लेकिन यहां भी स्थायी शिक्षकों की बहाली नहीं हुई, उन्हें संविदा पर रखा गया. कुल मिलाकर देखें तो बीएयू में 70 फीसदी शिक्षकों का अभाव है, बीएयू के कई विभागों में तो एक शिक्षक हैं और वही शिक्षक उस विभाग के एचओडी भी हैं.

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छात्रों का रुझान बीएयू के प्रति उदासीन

बीएयू में लगातार शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों का कृषि शोध सुचारु रूप से नहीं चल रहा है. शोध कर रहे छात्रों को अपने विषय पर, शिक्षकों की कमी के कारण तकनीकी मदद नहीं मिल पा रही है. सांख्यिकी विभाग के डॉ मलय के सेवानिवृत होने के बाद छात्रों को शोध के दौरान डाटा संग्रह करने में काफी पेरशानी होती है.

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वहीं कई विभागों के महत्वपूर्ण शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण आइसीआरआइ की कई योजनाओं पर बीएयू कार्य नहीं कर पा रहा है. शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों का रुझान बीएयू के प्रति कम होता जा रहा है. हाल ही में झारखंड कंबाइन परीक्षा -2018 के माध्यम से कम ही छात्रों ने कृषि वैज्ञानिक के रूप में बीएयू में आवेदन दिया.

BAUके इन विभागों में है शिक्षकों की कमी, लग सकता है ताला

बीएयू के वेटनरी एंड एनिमल हसबेंडरी विभाग में नियमित रूप से दो शिक्षक ही बच गये हैं. इस विभाग में 15 से 20 शिक्षकों की आवश्यकता है. विभाग को वीसीआई से मान्यता लेने के लिए संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. हॉटिकल्चर विभाग में गिनती के तीन शिक्षक ही काम कर रहे हैं. इस विभाग में एचओडी समेत 10 शिक्षकों की जरुरत है. एग्री बिजनेस मैनजमेंट विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर शिक्षक बहाल किये गये हैं. हालांकि विभाग के निदेशक स्थायी रूप से बहाल किये गये हैं. वहीं बीएयू के फीसरी विभाग में एक ही शिक्षक वर्तमान में है, जो विभाग के एचओडी भी हैं और पूरे विभाग का कार्य एवं छात्रों की कक्षाएं यही देखते हैं.

कुल मिलाकर देखें तो यूजीसी के नियमों के अनुरूप बीएयू के कई विभागों में ताला लग सकता है. यूजीसी गाइडलाइन के अनुरूप शिक्षक नहीं होने पर यूजीसी इन विभागों को बंद सकती है.

राज्य गठन के बाद BAU में नहीं हुई शिक्षकों की बहाली

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बीएयू में शिक्षकों की कमी हाल के दिनों से उत्पन्न नहीं हुई है. शिक्षकों की कमी 15 से 20 वर्षो से चली आ रही है. लेकिन सरकार एवं कृषि विभाग की उदासीनता के कारण बीएयू को शिक्षक पर्याप्त संख्या में नहीं मिल पा रहे हैं. झारखंड गठन के 18 वर्ष होने के बाद भी बीएयू पर सरकार का ध्यान नहीं गया है. इन 18 सालों में कितनी सरकारें आयी, लेकिन किसी भी सरकार ने यहां के शिक्षकों की कमी पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया.

बिना शिक्षक बीएयू ने खोल दिये पांच कॉलेज

शिक्षकविहीन बीएयू अपनी यूनिवर्सिटी कैंपस में ठीक से बच्चों को कृषि वैज्ञानिक बनाने में मदद नहीं कर पा रहा है. लेकिन बीएयू का शिक्षा प्रसार विभाग, राज्य के जिलों में कॉलेज खोलने पर जोर दे रहा है. विगत दो सालों में बीएयू ने पूरे राज्य में सात कॉलेज आधारभूत संरचना के साथ खोले और छात्रों का नामांकन भी लिया. लेकिन इन कॉलेजों में छात्रों को शिक्षक नहीं मिल रहे हैं. इसके कारण छात्र कई कॉलेज छोड़ रहे हैं.

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कॉलेज ऑफ फिसरी, गुमला का आलम ये है कि यहां छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक जब रांची से आते हैं तभी छात्र पढ़ पाते हैं. देवघर का रविंद्रनाथ टैगौर एग्रीकल्चर कॉलेज का भवन तो बन गया है, लेकिन कैंपस की चहरदीवारी नहीं होने के कारण कॉलेज आरंभ होने से पहले की चोरों की पहली पसंद बन गयी है. बीएयू को इस कॉलेज को सुरक्षा देने के लिए गार्ड बहाल करने में समस्या आ रही है. एग्रीकल्चर कॉलेज, गढ़वा में छात्रों ने नामांकन तो ले लिया है. लेकिन यहां भी शिक्षकों की घोर कमी है. गोड्डा के तिलका मांझी एग्रीकल्चर कॉलेज का हाल इन्हीं कॉलेजों की तरह है, जहां छात्रों ने नामांकन तो लिया है लेकिन शिक्षकों की राह देख रहे हैं.

इस विषय पर बीएयू के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल शिक्षकों की बहाली विश्वविद्यालय स्तर से नहीं की जा सकती है. लेकिन कॉलेजों में पाठ्यक्रम आरंभ करने के उद्देश्य से सभी कॉलेजों में संविदा पर शिक्षक बहाल किये जा रहे हैं.

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शिक्षकों की कमी दूर करने की पहल जारी- प्रशासन

बीएयू के प्रशासनिक निदेशक डॉ डीएन सिंह ने कहा कि बीएयू में शिक्षकों के लिए कुल 800 पद स्वीकृत हैं. इसके अलावे वर्तमान में केवल 250 शिक्षक ही कार्यरत्त हैं. पिछले दो सालों में सरकार एवं बीएयू प्रशासन के सहयोग से सात कृषि कॉलेज खोले गये हैं. इन कॉलेजों में बीएयू को 400 शिक्षकों की आवश्यकता है. फिलहाल बीएयू में शिक्षकों की कमी संविदा पर बहाली के माध्यम से की जा रही है. छह महीने के अुनबंध पर शिक्षकों की बहाली बीएयू के द्वारा हो रही है.

शिक्षकों कमी, सरकार के अधीन मामला- बीएयू

बीएयू के पीआरओ पंकज वत्सल ने कहा कि बीएयू में 70 फीसदी शिक्षकों की कमी है. इसके कारण कृषि तकनीक शोध में समस्या आ रही है. शिक्षकों एवं कर्मचारियों की कमी के लिए बीएयू प्रशासन संविदा पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बहाली कर रही है. शिक्षकों की कमी के बारे में सरकार को अवगत कराया गया है. कार्मिक विभाग से पदों का सृजन होने के बाद से जेपीएससी के माध्यम से शिक्षकों की बहाली होगी.

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