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कुड़ुख भाषा सीखने के लिए तैयार हुआ एप

अब एप से सीखें कुड़ुख पढ़ना, लि‍खना और बोलना

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  • तोलोड़ सिकि मोबाइल एप किया गया लांच
  • बिना इंटरनेट कनेक्शन के चलेगी एप

Ranchi: कुड़ुख भाषा प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. अब कुड़ुख भाषा लोग अपने मोबाइल फोन पर सीख सकते हैं. इसके लिए तोलोड़ सिखि एप का लोकापर्ण शुक्रवार को किया गया. अखिल भारतीय तोलोड़ सिकि प्रचारिणी सभा, अद्दी कुड़ुख चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, आदिवासी छात्र संघ और झारखंड कुड़ुख विकास छात्र संघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में एप का लोकापर्ण किया गया.

एप का निर्माण उर्सुटेक बैंगलोर के इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टोप्पो ने किया है. वह पिछले 19 साल से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुड़ुख भाषा को जनता तक पहुंचाने के लिए एप का निर्माण किया गया. बहुत से ऐसे लोग हैं जो कुड़ुख भाषा बोलना जानते हैं, लेकिन वे इसकी लिपि तोलोड़ को नहीं जानते. जिसके कारण एप निर्माण किया गया.

डेढ़ माह का लगा समय

जॉन ने बताया कि एप निर्माण करने में डेढ़ माह का समय लगा. इस बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके दोस्तों से उन्हें तोलोड़ एप बनाने की प्रेरणा मिली. जिसके बाद वे तोलोड़ सिकि लिपि के संस्थापक डॉ नारायण टोप्पो के संपर्क में आये. जॉन ने कहा कि लिपि देखने के बाद लगा कि एप बनाया जा सकता है और तब इस पर काम शुरू किया गया.

अक्षर ज्ञान से लेकर वाक्य निर्माण तक सीखें

इस एप के जरिये लोग तोलोड़ अक्षर ज्ञान से लेकर वाक्य निर्माण तक सीख सकते हैं. गूगल प्ले स्टोर से एप डाउनलोड करने के बाद इसमें अलग-अलग टैब दिये गये हैं. हर टैब की अपनी विशेषता है. जो लोगों को सीखने, पढ़ने और बोलने में मदद करेगी. एप डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर में कुड़ुख लर्न लिखकर सर्च करना होगा.

25 दिनों में 1400 लोगों ने किया इंस्टॉल

उन्होंने कहा कि एप को गूगल प्ले स्टोर में डाले लगभग 25 दिन हो गये है. इन 25 दिनों में लगभग 1400 लोगों ने एप्प इंस्टॉल किया है. जो दर्शाता है कि कुड़ुख भाषा के प्रति लोगों का लगाव है.

आने वाले समय में जोड़े जायेंगे अन्य फीचर

एप्प में आने वाले तीन माह में अन्य फीचर भी जोड़े जायेंगे. जॉन ने बताया कि आने वाले समय में एप्प में ऐसे फीचर जोड़े जायेंगे, जो लोगों को प्रति दिन एक नया शब्द सि‍खाएगा और इसके लिए मोबाइल में नोटिफिकेशन भी आयेगा. साथ ही इसी एप्प में टाइप कर अन्य एप्प में चैटिंग के लिए भी तोलोड़ लिपि का इस्तेमाल किया जा सकता है.

बिना इंटरनेट के चलेगी एप

तोलोड़ लिपि के सर्जक डॉ नारायण टोप्पो ने जानकारी दी कि राज्य के गांवों में कुड़ुख भाषा अधिक बोली जाती है. इसे ध्यान में रखते हुए एप का निर्माण किया गया है. जिससे एप गांवों में बिना इंटरनेट कनेक्शन के चलेगी. मौके पर तोलोड़ फॉण्ट निर्माता श्री किसलय, अजीत खलखो, गीता उरांव, रमन कुजूर, मंगरा उरांव,  सुशील उरांव, विनोद भगत, कमला लकड़ा समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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