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वनों पर आश्रित कोई भी जनजातीय और अन्य परिवार अपने स्थान से विस्थापित नहीं होगा : सीएम

झारखंड सरकार वनाधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी

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Ranchi : वनाधिकार के मामले को लेकर झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को खेल गांव में ही सर्वोच्‍य न्यायालय के निर्देश की समीक्षा की. समीक्षा के बाद सीएम ने कहा कि न्यायादेश के आलोक में पुनर्विचार के लिये राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करेगी. मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया. राज्य के जनजातीय समुदायों एवं अन्य परिवारों को उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें विस्थापित नहीं किया जायेगा. सरकार वनों पर आश्रित जनजातीय एवं अन्य परिवारों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है.

कई संगठनों ने जताया है विरोध

झारखंड के कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध भी जताया है. संगठनों का कहना है कि आदिवासियों को वन भूमि से हटाने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है. देश के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब आदिवासियों के खिलाफ ऐसा निर्णय आया हो, जिनकी जिंदगी ही जंगलों पर निर्भर रहती है. झारखंड वनाधिकार मंच ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 27 जुलाई तक जंगलों से आदिवासियों को हटाया जाये. इस निर्णय में आदिवासियों को अतिक्रमणकारियों की तरह पेश किया गया है, जो गलत है. आदिवासी कभी अतिक्रमणकारी नहीं हो सकते. केंद्र सरकार की नजरअंदाजी के कारण ऐसा एकपक्षीय निर्णय आया है

11 लाख परिवारों पर पड़ेगा असर

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 11 लाख परिवारों को देश भर में जंगल से हटाया जायेगा. राज्य में इनकी संख्या लगभग 30 हजार होगी. ऐसे में एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित होगी. केंद्र सरकार की ओर से यह नहीं बताया गया कि जंगल में रहनेवालों को कई सालों से उनका दावा नहीं दिया जा रहा. राज्य के विभाग और मंत्रालय में इनके मामले लंबित है.


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