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अनु पाठक हत्याकांड : आरोपी पति विनोद पाठक को आजीवन कारावास

बेटी र्कीति पाठक के बयान पर न्यायाधीश ने सुनाया फैसला

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Hazaribagh : शहर बड़ीबाजार थाना क्षेत्र के जयप्रभा नगर में 29 जनवरी 2018 को दिल दहला देने वाली घटना हुई थी. इस घटना के मुख्य आरोपी अनु पाठक के पति विनोद पाठक के फैसले को लेकर पूरे शहरवासियों की निगाहें टिकी हुई थी, 14 महीने में ही अदालत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार ने तमाम बिंदु को ध्‍यान में रखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

बड़ी बेटी ने पिता के खिलाफ दर्ज करायी थी प्राथमिकी

बताते चलें कि सीएमपीडीआइ रांची के हेड क्लर्क (बड़ा बाबू) विनोद पाठक का पुलिस इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर से अवैध संबंध को लेकर पत्नी से बढ़ते विवाद में अपनी पत्नी अनु पाठक की सिर काट कर हत्या कर दी थी. इसके बाद सिर को बोरे में और धड़ पांच टुकड़े में कर प्लास्टिक में बांध कर पलंग (दीवान) के बॉक्स में छुपा दिया था.

घटना को अंजाम देने के बाद बिनोद पाठक बड़ा बाजार थाना पहुंच कर उसने पत्नी की गुमशुदगी का आवेदन दिया और कहीं चला गया. इसी बीच घर से दुर्गंध आने पर हत्यारा विनोद पाठक की पुत्री कीर्ति पाठक ने पुलिस को फोन कर सूचना दी कि उसकी मां की हत्या पिता ने कर दी है.

पुलिस हत्यारे के घर पहुंची और कमरे का ताला तोड़ कर दीवान में रखे शव बरामद किया था. घटना में पुलिस ने विनोद पाठक की बड़ी पुत्री र्कीति पाठक के लिखित आवेदन पर बड़ीबाजार थाना में कांड संख्या 80/2018 के तहत मुकदमा दर्ज किया था.

दर्ज आवेदन में मां की हत्या में पिता बिनोद पाठक के साथ विनोद पाठक की कथित प्रेमिका पुलिस इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर को बताया गया था. जिसे हज़ारीबाग पुलिस ने दोनों आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था.

इधर मां की हत्या और पिता के जेल जाने बाद दो बेटी और एक बेटा के परवरिश को लेकर अब भी लोगों के मन मे कौतुहल का विषय बना हुआ है.

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भादस की धारा 302, 201 के तहत विनोद पाठक दोषी पाया गया

हज़ारीबाग न्यायालय में चले 14 महीने के ट्रायल में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायधीश रमेश कुमार ने हज़ारीबाग केंद्रीय कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विनोद पाठक को अपनी पत्नी अनु पाठक की हत्या मामले में भादस की धारा 302, 201 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

बता दें कि बीते 16 मार्च को साक्ष्‍य के आधार पर दोषी पाया गया था और 28 मार्च तक के लिए फैसले को सुरक्षित रखा गया था.

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क्या था पूरा मामला

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अनु पाठक हत्याकांड में पुलिस इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताई थी कि अनु पाठक के पति विनोद पाठक का उससे दो साल से अफेयर था, यही हत्या का कारण बना. बता दें कि 29 जनवरी 2018 को जयप्रभा नगर में बिनोद ने अपनी पत्नी अनु पाठक की हत्या कर दी थी.

उनकी 15 साल की बेटी र्कीति ने थाने में अपने पिता पर हत्या का मामला दर्ज कराया था. वहीं मंजू ठाकुर और पिता के नाजायज रिश्तों के बारे में जानकारी दी थी. अपनी पत्नी की हत्या करने बाद सिर से धड़ अलग करने का आइडिया मंजू ने ही दिया था.

पुलिस के मुताबिक विनोद पाठक ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद सीधा मंजू ठाकुर के पास खून से लथपथ पहुंचा था और हत्या के बारे में पूरी जानकारी दी थी. पुलिस को मंजू ने यह भी बताया था कि अनु का सिर से धड़ अलग करने का आइडिया उसने ही दिया था.

मंजू ने विनोद पाठक को हत्या करने के बाद अलग-अलग जगहों पर लाश छुपाने का तरीका भी बताया था. रस्सी और हत्या में शामिल चाइनीज चाकू मंजू ने ही मुहैया कराया था. घटना के बाद 32 बार मंजू ठाकुर और विनोद पाठक में बातचीत हुई थी.

बिनोद की प्रेमिका मंजू ठाकुर अपने भाई के कॉन्टेक्ट में लगातार रही थी वह मोबाइल बदल-बदल कर बातचीत किया करता था. नए नंबर से मंजू ठाकुर से बात करता था ताकि किसी को शक न हो.

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हत्‍या के लिए क्राइम पेट्रोल देखता था विनोद पाठक

अनु पाठक की हत्या की प्लानिंग हत्या के 10 से 15 दिन पहले बनी थी. आगे मंजू ठाकुर ने पुलिस को बताई की बिनोद को क्राइम पेट्रोल व सावधान इंडिया देखने के लिए प्रेरित करती थी. पूछताछ के बाद यह भी बात सामने आयी कि विनोद रात को क्राइम पट्रोल और सावधान इंडिया देखा करता था.

मंजू उसे बराबर क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया देखने के लिए कहा करती थी. इसलिए मर्डर करने के बाद सबूत छुपाने का तरीका इन्हीं टीवी प्रोग्राम से सीखा था.

पत्नी की हत्या के बाद विनोद को बड़ा बाजार टीओपी में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराने के लिए मंजू ने ही कहा था. मामला दर्ज कराने को लेकर मंजू ने थाना के इंचार्ज पर दबाव भी डाला था. हत्या के दिन सुबह में अनु पाठक ने मंजू ठाकुर को फोन पर कहा था कि आपलोग चाहें तो शादी कर लीजिए, हमको कोई एतराज नहीं है, लेकिन उनको (विनोद) समझाइए कि बच्चों को टॉर्चर नहीं करें.

हत्या के बाद बिनोद पाठक ऑफिस के सिक्युरिटी सुपरवाइजर की कार से भाग कर डोभी गया पहुंचा था. उसके बाद हज़ारीबाग पुलिस ने गया से विनोद पाठक को और कोडरमा से पुलिस इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर को गिरफ़्तार कर जेल भेजा था.

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