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‘अनुपम खेर’ और झारखंड फिल्म इंडस्ट्री का ‘सारांश’

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: 25 मई 1984 को महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ आयी थी. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद फिल्म निर्माता से ज्यादा नाम फिल्म में अहम किरदार निभानेवाले अनुपम खेर का हुआ. अनुपम खेर ने इस फिल्म के बाद एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया. फिल्मी जगत में उनकी सफलता और राजनीति में बीजेपी के साथ मधुर संबंध की वजह से उन्हें झारखंड में फिल्मों में चार-चांद लगाने का मौका मिला. लेकिन हुआ कुछ नहीं. झारखंड को फिल्मों के मामले में नंबर वन बनाने की बात को लेकर अनुपम के झारखंड दौरे ने एक समय खूब सुर्खियां बटोरीं. लेकिन गौर करनेवाली बात है कि झारखंड के जिस फिल्मी कमेटी (झारखंड फिल्म तकनीकी सलाहकार बोर्ड) का चेयरमैन उन्हें बनाया गया, उस कमेटी की मीटिंग में उन्होंने बस दो बार ही भाग लिया. एक बार तय तारीख के दिन और दूसरी बार अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान झारखंड दौरे पर रहने की वजह से.

नाम बड़े और दर्शन छोटे

झारखंड में फिल्मों का व्यापार शीर्ष पर पहुंचाने के मकसद से जिस कमेटी (झारखंड फिल्म तकनीकी सलाहकार बोर्ड) का गठन किया गया. उसमें सिर्फ अनुपम खेर ही बड़े नामों में शामिल नहीं हैं. इनके अलावा कभी भी कमेटी की बैठक में हिस्सा ना लेने वाली फेहरिस्त में से रवि किशन और इम्तियाज अली जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. 2016 में जब जेएफटीएसी (झारखंड फिल्म तकनीकी सलाहकार बोर्ड) बना तो मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता था कि आने वाले दिनों में फिल्मों के मामले में झारखंड की सूरत बदल जाएगी. लेकिन आरपीआरडी का कार्यालय गवाह है कि अब भी झारखंड में फिल्म बनाने के लिए करीब 100 प्रपोजल धूल फांक रहे हैं. इनकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है.

सरकार बनाने जा रही है नयी कमेटी, शामिल होंगे गैर फिल्मी लोग

अनुपम खेर जैसे फिल्मी दिग्गज के चेयरमैन होने के बाद जेएफटीएसी की अपार असफलता के मद्देनजर आइपीआरडी अब नयी कमेटी का गठन करने जा रही है. नयी कमेटी में कुछ ऐसे लोगों को शामिल किए जाने की कवायद चल रही है, जिनका फिल्मों से दूर-दूर तक कोई नाता रिश्ता नहीं है. ऐसे नामों में सबसे आगे पंकज सोनी का नाम चल रहा है. पंकज सोनी एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं. फिल्मों से उनका कोई नाता-रिश्ता नहीं है. बावजूद इसके उन्हें कमेटी में जगह दिए जाने की जद्दोजहद चल रही है. इनके अलावा और भी कुछ नाम हैं. खबर यह भी है कि नयी कमेटी से झारखंड के मशहूर गायक और नागपुरी नृत्य कलाकार पद्मश्री मुकुंद नायक का नाम काटने की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि राजेश जैस को नयी कमेटी का चेयरमैन बनाया जा सकता है. राजेश जैस झारखंड के ही हैं और फिल्म में एक्टिंग का उन्हें काफी लंबा अनुभव है.

जानें कमेटी के मौजूदा स्वरूप को

पुरानी कमेटी में अनुपम खेर के अलावा 12 सदस्य थे. इनमें ऋषि प्रकाश मिश्रा (फिल्म निर्माता), पद्मश्री मुकुंद नायक, अजय मलकानी (एनएसडी पास आउट), महेश मांझी (एफआइटी पासआउट), रमेश हांसदा (संथाल बीजेपी के सह प्रभारी), हरि मित्तल (एक्टिंग टीचर), नेहा तिवारी (लेक्चरर्र, मासकॉम, करीम युनिवर्सिटी), पायल कश्यप (निर्देशक), स्टेफी टेरेसा मुर्मू (लेखक), डॉ. रत्न प्रकाश (रि. हिंदी प्रोफेसर, रांची युनिवर्सिटी), रवि किशन (भोजपुरी कलाकार), इम्तियाज अली (निर्देशक).

कमेटी के लोग अधिकारियों पर लगाते हैं आरोप

कमेटी के कुछ लोगों का कहना है कि आइपीआरडी के शीर्ष अधिकारियों की वजह से झारखंड में फिल्म का यह हाल है. नाम न छापने की सूरत में एक सदस्य ने कहा कि यहां तो यह हाल है कि अगर आप ज्यादा एक्टिव दिखते हैं, तो अधिकारी पूछने लगते हैं कि क्या बात हैं. आप इतने उत्साहित क्यों हैं. कहा जाने लगता है कि आपकी काफी शिकायत आ रही है. एक सदस्य का कहना है कि पूर्व सचिव संजय कुमार जब तक थे, तब तक सबकुछ ठीक-ठाक था. लेकिन उनके जाने के बाद हालत काफी खराब है. एक साल से तो कमेटी की बैठक नहीं हुई. बार-बार मीडिया में खबर चली की अनुपम खेर को कमेटी के चेयरमैन से हटाया जा रहा है. लेकिन औपचारिक रूप से वो आज भी कमेटी में अध्यक्ष हैं. हाल यह है कि जो झारखंड में फिल्म बनाने की चाह रखते हैं, वो बस ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं. छोटे फिल्म निर्माता झारखंड का रुख करना ही नहीं चाह रहे हैं.

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