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मेरे स्पष्टीकरण का नहीं दिया जवाब, अब मुख्यमंत्री के समक्ष स्थिति स्पष्ट करें

Ranchi: कृषि व पशुपालन सचिव पूजा सिंघल ने दुमका में तालाब, डोभा निर्माण और डीप बोरिंग कार्य में हुए अनियमितता को लेकर दो दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने भूमि संरक्षक दुमका से कहा है कि मंगलवार 25 सितंबर को होनेवाले मुख्यमंत्री जन संवाद कार्यक्रम में पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण दें. उन्होंने भूमि संरक्षक से 24-25 सितंबर तक जांच रिपोर्ट मांगा था. 21 सितंबर को विभागीय सचिव ने भूमि संरक्षक निदेशक को टेलीफोन कर गड़बड़ियों की जांच करने को कहा था. मीडिया में पशुपालन घोटाले की तरफ तालाब की खुदाई के बाद कार, ऑटो और बाइक से मिट्टी ढोये जाने और संबंधित दस्तावेज गायब करने की रिपोर्ट छपी थी. इसको लेकर विभागीय सचिव ने मुख्यमंत्री रघुवर दास की ओर से मांगे गये स्पष्टीकरण के बाद विस्तृत जांच करने के प्रारंभिक आदेश दिये थे.

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भूमि संरक्षक का स्पॉट पर नहीं जाना आचरण के प्रतिकूल

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विभागीय सचिव ने भूमि संरक्षक की तरफ से दुमका जाकर मामले की जांच नहीं करने को काफी गंभीरता से लिया है. 24 तक स्पॉट पर जाकर मुख्यालय तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश का अनुपालन नहीं करने से विभागीय सचिव खासा नाराज हैं. जांच अधिकारी की ओर से स्पष्ट जवाब भी नहीं दिये जाने को अशोभनीय और सरकारी कार्य में आचरण के प्रतिकूल बताया गया है. श्रीमती सिंघल ने कहा है कि योजना के नियंत्री पदाधिकारी भूमि संरक्षक ही हैं. ऐसे में उन्हें मीडिया के सवालों के आधार पर 13 सितंबर को ही जांच पूरी कर लेनी चाहिए थी. योजना के क्रियान्वयन में हुई गड़बड़ी और अनियमितता को रोकने के लिए उठाये गये कदम की सूचना मुख्यालय को देनी चाहिए थी. पर ऐसा नहीं हुआ, जो अधिकारी की कर्तव्यहीनता का द्योतक है. विभागीय प्रमुख का मानना है कि सरकार की तरफ से दिये गये निर्देशों की अवहेलना भूमि संरक्षक ने की है, जिससे यह प्रतीत होता है कि वे दोषी व्यक्तियों का साथ दे रहे हैं और योजना से संबंधित दस्तावेज में हेराफेरी कर सकते हैं.

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पदाधिकारियों का वेतन रोकने का दिया था आदेश

सचिव की तरफ से चार सितंबर को हुई जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में 14 जिलों के भूमि संरक्षण पदाधिकारियों के कार्यों को असंतोषजनक पाते हुए उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया था. मुख्यालय में सभी संबंधित पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग भी की गयी थी. जिसका जवाब किसी ने नहीं दिया. उन्होंने कहा है कि जिलों में तालाबों के जिर्णोद्धार करने की उपयोगी स्कीम भूमि संरक्षण निदेशालय की तरफ से की जाती है. इस योजना का सही तरीके से मॉनिटरिंग कई जगहों पर नहीं हो रहा है और इसके क्रियान्वयन पर पदाधिकारी ढिलाई भी बरत रहे हैं. इस पर सभी पदाधिकारी की यह महती जिम्मेवारी है कि वे सही तरीके से अपने कार्यों पर अमल करें.

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