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झारखंड से रेलवे को सालाना 25 हजार करोड़ का राजस्व, पैसेंजर्स एसोसिएशन ने रेल मंत्रालय से की SECR का मुख्यालय की मांग 

 

 Ranchi. झारखण्ड पैसेंजर्स एसोसिएशन ने रेल मंत्रालय को लेटर लिखा है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार सरावगी एवं मानद सचिव प्रेम कटारूका ने केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनय कुमार त्रिपाठी से आग्रह किया है कि झारखण्ड स्तरीय एक नया क्षेत्रीय मुख्यालय (दक्षिण पूर्व पश्चिम रेलवे) का गठन हो. राज्य गठन को 20 साल से अधिक समय बीत गए हैं. पर अब तक रेलवे सुविधाओं के मामले में अब भी इस राज्य को वाजिब हक नहीं मिला है. झारखंड से रेल मंत्रालय- भारतीय रेलवे को सालाना लगभग 25 हजार हजार करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की प्राप्ति होती है. इसे देखते झारखण्ड में रेलवे के बुनियादी ढांचे को विकसित करने हेतु रांची में एक नए क्षेत्रीय मुख्यालय दक्षिण पूर्व पश्चिम रेलवे का गठन किया जाना चाहिए. यहीं मुख्यालय भी हो.

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250 से अधिक रेलवे स्टेशन

Sanjeevani
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एसोसिएशन के मुताबिक 15 नवंबर, 2000 को एकीकृत बिहार से अलग होने के बाद झारखंड बना. झारखंड के सभी निकटवर्ती राज्यों जैसे ओड़िसा, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलांगना, छत्तीसगढ़ आदि में महाप्रबंधक की अध्यक्षता में कम से कम एक क्षेत्रीय रेलवे मुख्यालय है. इससे उन्हें लाभ मिल रहा. वे अपने क्षेत्रीय रेलवे को विकसित कर बेहतर यात्री सुविधाओं में वृद्धि कर रहे हैं. रेलवे के बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को सुदृढ़ कर रेलवे के राजस्व में वृद्धि करने में भी लगे हैं.

जब नए राज्य के तौर पर तेलंगाना बना तो रेल मंत्रालय-रेलवे बोर्ड द्वारा एक नया क्षेत्रीय मुख्यालय “साउथ कोस्ट रेलवे” का गठन किया गया. राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए रेलवे डिवीजनों को पुनर्गठित किया गया. प्रस्तावित नया क्षेत्रीय मुख्यालय दक्षिण पूर्व पश्चिम रेलवे के गठन से झारखंड के 250 से अधिक रेलवे स्टेशनों और विभिन्न रेल मंडलों को लाभ होगा. 

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धनबाद रेल मंडल के अतंर्गत धनबाद, गढ़वा, पलामू, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह और लातेहार जिलों में रेलवे लाइन को कवर किया जा सकता है. जसीडीह रेल मंडल के जरिए देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में रेलवे लाइन को कवर करना संभव है. रांची रेल मंडल के तहत रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़ और बोकारो जिलों के रेलवे लाइन को कवर करने में मदद मिलेगी. चक्रधरपुर रेल मंडल के माध्यम से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावा, पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा जिलों में रेलवे लाइन को कवर करना संभव है. कुल मिलाकर प्रस्तावित क्षेत्र में 255 रेलवे स्टेशनों (जो वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों के तहत काम कर रहे हैं) को शामिल करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है.

मौजूदा क्षेत्रों के पुनर्गठन और एक नए क्षेत्र के निर्माण से झारखंड को धनबाद (कोयला हब), चक्रधरपुर (लौह अयस्क और वन उत्पाद  हब), जसीडीह (पत्थर उत्खनन केंद्र और तीर्थ केंद्र) और राज्य की राजधानी रांची (शिक्षा, कोयला और बॉक्साइट हब) से आर्थिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी. रांची में एक नए क्षेत्रीय मुख्यालय के गठन से झारखंड के प्राकृतिक सौन्दर्य, उत्तम स्वास्थ्य अनुकूल जलवायु और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध खनिज व वन सम्पदा का वाजिब उपयोग संभव होगा. ऐसे में रांची में एक क्षेत्रीय रेलवे मुख्यालय होना चाहिए.

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