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रामटहल के निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद BJP ने की विशेष रणनीति पर चुनाव लड़ने की तैयारी

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Ranchi : भाजपा से रांची के सांसद रामटहल चौधरी ने टिकट ना मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. उनके इस बगावती तेवर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुबोधकांत सहाय को जहां कुछ राहत मिलती दिख रही है. वहीं उनकी जीत को रोकने के लिए भाजपा ने भी विशेष रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.

गौरतलब है कि रांची लोकसभा सीट अंतर्गत छह विधानसभा सीट रांची, कांके, हटिया, खिजरी, ईचागढ़ और सिल्ली शामिल है. इन छह सीटों में पांच पर भाजपा काबिज है. भाजपा ने अपने सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि  सबसे प्रमुख पांच विधायकों के बीच के आपसी मतभेद दूर कर काम करना है. साथ ही पार्टी समर्थित पार्षदों के सहयोग से सही तरीके से बूथ मैनेजमेंट भी करना है. इन विधायकों के जातीय समीकरण का भी आकलन किया जा रहा है.

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छह में से पांच विधायक भाजपा के, बन सकता है मजबूत आधार

• आंकड़ो के समीकरणों के अनुसार देखें तो रांची विधानसभा सीट में भाजपा और जेएमएम के बीच 2014 में विधानसभा में टक्कर थी. इसमें सीपी सिंह (भाजपा) और महुआ माजी (जेएमएम) उम्मीदवार थे. इसमें सीपी सिंह को 95,760 और महुआ माजी को 36,897 को वोट मिले थे.
• खिजरी में भी भाजपा के रामकुमार पाहन और कांग्रेस के सुंदर तिर्की के बीच कड़ी टक्कर थी. इसमें रामकुमार पाहन को 94581 और सुंदरी तिर्की को 29669 वोट मिले थे.
• कांके विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार जीतू चरण राम और कांग्रेस से सुरेश कुमार बैठा के बीच लड़ाई थी. इसमें जीतू चरण राम को 115702 और सुरेश कुमार बैठा को महज 55898 वोट मिले थे. जीतू चरण राम भारी मतों से विजय हुए थे.
• ईचागढ़ विधानसभा से भाजपा के साधुचरण महतो और जेएमएम की सविता महतो के बीच टक्कर थी. इसमें साधुचरण महतो को 75634 और सविता महतो को 333844 वोट मिले थे.
• हटिया से भाजपा से सीमा शर्मा और जेवीएम के नवीन जायसवाल के बीच कड़ी टक्कर थी. इसमें सीमा शर्मा को 80210 और नवीन जायसवाल को 88,228 वोट मिले थे. बता दें कि विधायक नवीन जायसवाल जीत दर्ज करने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे. हटिया क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहे सुनील सहाय उम्मीदवार थे, जिन्हें काफी कम वोट मिला था. ऐसे में नवीन जायसवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा हटिया विधानसभा दोगुनी मजबूत हो गई है.
• सिल्ली विधानसभा की बात करें तो सिल्ली में पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी सीमा महतो और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के बीच कड़ी टक्कर थी. इसमें सीमा महतो को 79747 और सुदेश महतो को 50007 वोट पड़े थे. सिल्ली में जेएमएम ने भले ही सीट अपने नाम कर ली है, पर एनडीए की घटक दल आजसू की सिल्ली में काफी अच्छी पकड़ है. अगर एनडीए (भाजपा के घटक दल) के जीते हुए विधायकों और यूपीए (कांग्रेस के घटक दल) के उम्मीदवारों के वोट को मिला दिया जाए तो भाजपा कई गुना मजबूत नजर आ रही है. उल्लेखनीय है कि एनडीए के पांच विधायक अपने-अपने क्षेत्र में जातीय समीकरण के अनुसार अच्छी पकड़ रखते हैं.

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वोट प्रतिशत से भी भाजपा की स्थिति है मजबूत

विधानसभा चुनाव में लोग प्रदेश के मुद्दे को देख कर अपने-अपने उम्मीदवार को वोट करते हैं. वहीं लोकसभा में स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे दोनों ही हावी होते हैं. अगर 2014 लोकसभा की बात करें तो भाजपा से रामटहल चौधरी को 4,48,729 वोट मिले और सुबोधकांत सहाय को 2,49,426 वोट मिले थे. आजसू के सुदेश महतो को 1,42,560 वोट मिले थे. वोट प्रतिशत की बात करें तो रामटहल चौधरी को 27 प्रतिशत, सुबोधकांत सहाय को 15 प्रतिशत और सुदेश महतो को महज 8 प्रतिशत वोट मिले थे.

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रांची लोकसभा में लगभग 16,48,459 मतदाता है, जिसमें 7,79,930 महिला और 8,68,528 पुरुष मतदाता शामिल हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव को देखें तो कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय को 3,10,499 और रामटहल चौधरी को 2,97,147 वोट मिले थे. अगर वोट प्रतिशत को देखे तो सुबोधकांत सहाय को 19 प्रतिशत और रामटहल चौधरी 18 प्रतिशत वोट मिले थे.

आंकड़ो से साफ है कि सुबोधकांत के लिए रांची सीट जीतना काफी कठिन नजर आ रहा है. हालांकि सुबोधकांत के लिए राहत की बात यह है कि रामटहल चौधरी भाजपा के टिकट पर नहीं बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रहे हैं. ऐसे में इस बार रांची लोकसभा सीट त्रिशंकु होगा और नतीजा भी चौकाने वाले आएंगे.

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कब किस उम्मीदवार ने दर्ज की जीत

2014 – भाजपा के रामटहल चौधरी ने कांग्रेस के सुबोधकांत को हराया.
2009 – कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय ने भाजपा के रामटहल चौधरी दल को हराया.
2004 – कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय ने भाजपा के रामटहल चौधरी दल को हराया.
1999 – भाजपा के रामटहल चौधरी ने कांग्रेस के के.के. तिवारी को हराया.
1998 – भाजपा के रामटहल चौधरी ने कांग्रेस के केशव महतो कमलेश को हराया.
1996 – भाजपा के रामटहल चौधरी ने कांग्रेस के केशव महतो कमलेश को हराया.
1989 – जनता दल के सुबोधकांत ने भाजपा के रामहटल चौधरी को हराया.
1984 – कांग्रेस के शिव प्रसाद साहू ने भाजपा के रामटहल चौधरी को हराया.
1980 – कांग्रेस के शिवप्रसाद साहू ने जेएनपी के शिव कुमार प्रसाद सिन्हा को हराया.
1977 – बीएलडी के रविंद्र वर्मा ने कांग्रेस के शिव प्रसाद साहू को हराया.
1971 – कांग्रेस के प्रंशात कुमार घोष ने बीजेएस के रुद्र प्रताप सारंगी को हराया.
1967 – कांग्रेस के प्रशांत कुमार घोष ने बीजेएस के ए.एन.एस.सिन्हा को हराया.

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