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अन्ना हजारे ने मोदी सरकार के खिलाफ 30 जनवरी से भूख हड़ताल करने का लिया फैसला

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Mumbai : केंद्र की मोदी सरकार की कार्यशैली से नाराज अन्ना हजारे एक बार फिर भूख हड़ताल करेंगे. वह लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट-2013 को लागू नहीं करने की वजह से नरेंद्र मोदी सरकार से नाराज हैं. भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मोदी सरकार पर पिछले साल में कुछ नहीं करने का आरोप लगाया है और घोषणा की है कि वह 30 जनवरी से अपने गांव रालेगण सिद्धि में भूख हड़ताल करेंगे. अन्ना हजारे ने कहा, “लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट 2013 में बना. उसके बाद साल 2014 में मोदी सरकार केंद्र में आयी. मोदी सरकार के आने के बाद हमें लगा कि कुछ होगा, लेकिन इनलोगों ने भी पिछले पांच सालों में कुछ नहीं किया. इसलिए मैंने फैसला किया है कि 30 जनवरी से रालेगण सिद्धि में मैं भूख हड़ताल पर जाऊंगा.”

पत्र लिख जतायी थी नाराजगी

अन्ना हजारे ने इससे पहले पीएमओ को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से अपनी नाराजगी जतायी थी. पत्र में उन्होंने लिखा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पहले कहा कि लोकसभा में विपक्ष में कोई वरिष्ठ नेता नहीं होने के कारण लोकपाल नियुक्त नहीं किया जा सकता (जो नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा है) और बाद में कहा कि चयन समिति में कोई प्रतिष्ठित न्यायवादी नहीं है. पत्र में अन्ना हजारे ने बताया था कि वह अक्टूबर से ही रालेगण सिद्धि में आंदोलन करना चाहते थे, लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के आश्वासन के बाद उन्होंने सरकार को एक और मौका देने का मन बनाया था. अन्ना हजारे ने पत्र में मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि यह स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार की मंशा लोकपाल और लोकायुक्त नियुक्त करने की नहीं है.

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