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पशुपालन विभाग : अधिकारी ने सचिव को चिट्ठी लिखी तो निदेशक ने लगायी फटकार, ढाई साल से चल रही है कार्रवाई

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Ranchi : सरायकेला खरसावां के जिला गव्य विकास पदाधिकारी अनिल कुमार विभागीय नियमों से परे हैं. सरकारी कर्मी होने के बावजूद वे सरकर एवं सरकारी कर्मियों के खिलाफ लेटर लिखते हैं.

सरकार के कामकाज की समीक्षा करते हैं. उनकी ऐसी ही हरकतों के कारण उनके खिलाफ ढाई सालों से विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. उन्हें दंडित किये जाने पर फैसला लिये जाने की तैयारी है.

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बावजूद इसके वे लगातार अपनी सीमा से बाहर जा रहे हैं. उनकी हरकतों से परेशान गव्य विकास निदेशक ने उन्हें फटकार लगायी है. उनसे तीन दिनों के अन्दर जवाब मांगा है.

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निदेशक ने जतायी है आपत्ति

गव्य विकास निदेशक चितरंजन कुमार ने अनिल कुमार के कामकाज को लेकर उनसे जवाब मांगा है. 28 मई को जारी किये गये लेटर में उन्होंने कहा है कि आप सीधे सचिव को पत्र लिखते हैं. यह सही नहीं है.

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यह अनुशासनहीनता का उदाहरण है. गव्य विकास निदेशालय और राज्य सरकार के कामकाज की समीक्षा करना आपके दायरे से बाहर है. ऐसा आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 की कंडिका 3 (III) एवं 10 (i) का उल्लंघन है. निदेशालय और विभाग के पदाधिकारियों के बारे में आपका नजरिया बेहद भद्दा है.

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मैनपावर की कमी के लिए तीन पदाधिकारी दोषी

अनिल कुमार ने पशुपालन विभाग के सचिव को पिछले दिनों एक लेटर (पत्रांक 112, 12-05-20) लिखा था. इसमें उन्होंने गव्य विकास निदेशालय और संबंधित कार्यालयों में मैनपावर की कमी की बात कही थी. इसके लिए विभाग के तीन पदाधिकारियों को दोषी बताया था.

इसमें निदेशालय के अनूप कुमार प्रसाद (सांख्यिकी पदाधिकारी), रंजीत ओझा (सहायक प्रशाखा पदाधिकारी) और अवर सचिव सुमन साही का नाम लिया गया था. इनके खिलाफ कई आरोप लगाते हुए सचिव को लेटर भेज दिया था. हालांकि निदेशक ने उसके इस आचरण को गलत  बताते हुए जवाब मांगा है.

जनवरी 2018 से चल रही है विभागीय कार्रवाई की प्रकिया

अनिल कुमार लगातार विवादों के घेरे में आते रहे हैं. यही कारण है कि जनवरी, 2018 में उनके खिलाफ पशुपालन विभाग के द्वारा विभागीय कार्रवाई किये जाने की प्रक्रिया चल रही है. जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ विभागीय स्तर से उन्हें जल्दी ही दंडित किया जायेगा.

इसी साल लगभग 3 माह पूर्व भी अनिल कुमार के स्तर से लापरवाही बरते जाने पर उनसे जवाब माँगा गया है. 12 मई को उनके द्वारा निदेशक की बजाये सचिव को पत्र लिखा जाना भी विभाग के लिए गंभीर चिंता का सवाल बन गया है. विभाग ने इसके लिए चेतावनी भी जारी कर दी है.

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