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राज्य में हाथियों से होनेवाले नुकसान को रोकेगा ANIDERS

चाईबासा फॉरेस्ट डिविजन में शुरू हुई पहल

Ranchi : चाईबासा फॉरेस्ट डिविजन से राहतभरी खबर है. जंगली हाथियों के खौफ से लोगों को राहत दिलाने की मुहिम शुरू की गयी है. एलिफेंट कॉरिडोर माने जानेवाले इलाकों में ANIDERS (Animal intrusion detection and repellent system) का उपयोग करना वन विभाग ने शुरू किया है. मकसद हाथियों और मानवों की बीच हो रहे टकराव को रोकना है. फिलहाल तांतनगर ब्ल़ॉक के अंगारडीहा गांव में ANIDERS लगा कर ट्रायल किया जा रहा है. इससे जो रिजल्ट सामने आ रहे हैं, उससे उम्मीद की जा रही है कि हाथियों औऱ मानवों के बीच टकराव की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी.

कैसे काम करता है ANIDERS

चाईबासा डीएफओ सत्यम कुमार के अनुसार कुछ दिनों पहले अंगारडीहा गांव से ANIDERS के प्रयोग की शुरुआत की गयी है. झारखंड के किसी वन प्रमंडल में पहली बार इतनी आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है. चाईबासा वन प्रमंडल (पश्चिमी सिंहभूम) में इसकी शुरुआत हुई है. ANIDERS इंफ्रा रेड सेंसर पर आधारित तकनीक है. हाथियों के कॉरिडोर की पहचान करते हुए अंगारडीहा गांव के चारों ओऱ इसे लगाया गया है.

दिन या रात को जब भी हाथियों का मूवमेंट होता है, उस दौरान इसके जरिये विशेष तरीके के लाइट, साउंड पैटर्न उत्पन्न किया जाता है. इससे हाथी औऱ दूसरे जंगली जानवर डरते हैं और अपनी राह नहीं छोड़ते. वे गांव के अंदर घऱों, खलिहानों की ओऱ नहीं जाते. इससे हाथियों औऱ मानवों के बीच टकराव की गुंजाइश न्यूनतम हो जाती है. आगे इस तकनीक का उपयोग और 17 गांवों में किये जाने की तैयारी है.

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250 से अधिक घरों को हाथियों ने पहुंचाया नुकसान

चाईबासा फॉरेस्ट डिविजन की मानें तो 2020-12 में अभी तक हाथियों से भिड़ंत में एक व्यक्ति की जान जा चुकी है. वन विभाग के अधिकारी बिलाल अनवर के अनुसार हाथियों के साथ इंसानों की भिड़ंत का होना दुखद औऱ चुनौतीपूर्ण मामला है. इसके कारण 2017 से 2020 के बीच 11 लोग मारे जा चुके हैं. इसी अवधि में 18 लोग बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं.

हाथियों ने घरों और फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है. 2017-18 में 170, 2018-19 में 96 औऱ 2019-20 में 87 घरों को आंशिक तौर पर या पूरी तरह से तोड़ दिया. इन्हीं तीन सालों के दौरान फसलों को नुकसान पुंहचाये जाने के 1354 मामले दर्ज किये गये थे. इन मामलों में विभाग क्षतिपूर्ति भी करता रहा है. पर अब कोशिश यह है कि हाथियों औऱ इंसानों के बीच टकराव की स्थिति ही नहीं बने.

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इसके लिए सबसे पहले हाथियों के मूवमेंटवाले रास्तों और गांवों का सर्वे किया गया. इसके बाद ANIDERS का इंस्टॉलेशन अंगारडीहा गांव के चारों ओर हुआ. इस मशीन के इंस्टॉलेशन में आर्थिक सहयोग टाटा स्टील नोआमुंडी से मिला. माइनिंग क्षेत्रों में लगी कंपनियों के लिए वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान के अनुपालन में मदद करना जरूरी है. अब मशीन लगाये जाने से ना तो हाथियों का कॉरिडोर प्रभावित हो रहा है. साथ ही गांव के अंदर हाथियों का आवागमन भी कम होने लगा है. इसकी सफलता दूसरे गांवों में भी दोहरायी जायेगी.

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