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हरमू नदी सौंदर्यीकरण के कार्यप्रगति से नाराज सचिव ने एजेंसी के अधिकारियों को लगायी फटकार

सचिव अजय कुमार सिंह ने एजेंसी को दिये कई निर्देश और कहा- जरूरत हो तो और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगायें

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Ranchi: तय समय सीमा तक हरमू नदी के सौंदर्यीकरण कार्य पूरा नहीं होने से नाराज नगर विकास विभाग सचिव अजय कुमार सिंह ने एक बार फिर सौंदर्यीकरण कार्य देख रही ईगल इंफ्रा एजेंसी को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है. सचिव ने कहा है कि नदी के सौंदर्यीकरण का मकसद यह था कि नदी के पानी को स्वच्छ बनाया जाये, ताकि आसपास के लोग नदी के किनारे सुबह शाम टहल सकें. लेकिन, एजेंसी के ढुलमूल रवैये के कारण कार्य पूरा नहीं हुआ है. अगर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के कारण कार्य में धीमी गति है तो अन्य प्लांट लगाया जाये. सचिव अजय कुमार सोमवार को हरमू नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य प्रगति का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने जुडको और ईगल इंफ़्रा एजेंसी के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए आवयश्क सुझाव भी दिये. निरीक्षण के दौरान सचिव के साथ जुडको के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तकनीकी एसके साहू, रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड के पीआरओ अमित कुमार, जुडको, ईगल इंफ्रा कंपनी के पदाधिकारी मौजूद थे.

एसटीपी और पाथवे का किया निरीक्षण

हरमू मुक्तिधाम से लेकर रेलवे पुल के बीच जगह-जगह बने एसटीपी और पाथवे के निरीक्षण के दौरान सचिव ने पदाधिकारियों को कहा कि पूरे शहर का नाला इस नदी में गिर रहा है. इसलिए जरूरी है कि इस क्षेत्र में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता के मुताबिक कम है. ऐसे में जरूरी है कि अन्य प्लांट भी लगायी जाये. ऐसा होने पर ही नदी के पानी को अधिक अच्छी तरह से बनाया जा सकेगा.

स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम स्थल पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर जोर

हरमू नदी के अतिरिक्त विभागीय सचिव ने स्वर्णरेखा नदी के घागरा घाट का भी निरीक्षण किया. साथ ही स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम स्थल पर भी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को लेकर आवश्यक निर्देश दिया. दूसरे चरण में सचिव ने निर्देश दिया कि नये एसटीपी के लिए और कन्वेंशनल टेक्नोलॉजी के आधार पर वाटर फिल्ट्रेशन के लिए डीपीआर बना कर आगे के काम को पूरा किया जाये.

निरीक्षण के दौरान से सचिव ने दिये निर्देश

  • 1 महीने के अंदर हरमू नदी में गिर रहे सभी नालों के सामने स्क्रीन अर्थात जाली लगाया जाये.
  • नदी में गिरने वाले नालों को पहले ही एसटीपी से क्लीन करके नदी तक पहुंचाने का निर्देश.
  • नदी के सौंदर्यीकरण कार्य के लिए और भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का निर्देश.
  • नेचुरल प्रोसेस के अलावा कन्वेंशनल प्रोसेस के माध्यम से भी नालों के पानी को क्लीन कर नदी में लाने की दिशा में प्रयास करने.
  • स्वर्णरेखा से लेकर हरमू-विद्यानगर तक बनाये दोनों तरफ के पाथवे को नदी के मुहाने तक कनेक्ट किया जाये. जरूरत पड़ने पर सड़कों और रेलवे को क्रॉस करने के लिए ब्रिज या अंडरपास बनाया जाये.
  • नदी के किनारे चल रहे नालों से निकलने वाले गोबर और गंदे पानी के लिए जगह-जगह पर बायोगैस प्लांट लगाया जाये.
  • ड्रेनेज के पास से निकलने वाले सॉलि‍ड वेस्ट की नियमित सफाई हो. जरूरत के मुताबिक मैन पावर का इस्तेमाल हो.
  • पाथवे के दोनों तरफ पर प्लांटेशन सुनिश्चित हो.

8 में से 7 प्लांट हो चुका है पूरा

मालूम हो कि हरमू नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए लगातार सरकार प्रयास कर रही है. इस दिशा में 10.5 किलोमीटर तक कार्य हुआ है. पुरानी योजना के तहत 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना था, जिसमें सात एसटीपी काम करना शुरू कर दिया है.

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