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13 सूत्री मांगों ले आंगनबाड़ी सेविकाएं जुटीं, किया शक्ति प्रदर्शन

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Dhanbad : धनबाद की आंगनबाड़ी सेविकाओं ने शनिवार को अपनी 13 सूत्री मांगों को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया. गोल्फ ग्राउंड से बड़ा जुलूस बनाकर सेविकाएं रणधीर प्रसाद वर्मा चौक स्थित गांधी सेवा सदन पहुंची. यहां भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ झारखंड प्रदेश के बैनर तले सभा की गयी. कार्यक्रम में मुख्य रूप से ओडिशा से आयी अखिल भारतीय आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जेनरल सेक्रेटरी अंजली पटेल ने कहा कि वेतन विसंगति, स्थायीकरण, सामाजिक सुरक्षा के सवाल पर आंगनबाड़ी की बहनें सालों से आंदोलन कर रही हैं. 60 साल के बाद सेवानिवृत्त होने वाली आंगनबाड़ी बहनों को सेवानिवृत्ति का उचित लाभ मिलना चाहिए. चार-चार महीने से मानदेय बकाया रह जाता है. मानदेय समय पर मिलना चाहिए. सभा को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया.

15 हजार और साढ़े सात हजार मिलना चाहिए

आंगनबाड़ी सेविका सहायिका को मिलने वाला मानदेय राशि 4400 और 2200  को ना काफी बताया गया. वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने इनके मानदेय में 1500 और 750 रुपये की वृद्धि अवश्य की है परन्तु इनके भरण पोषण के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं है.पोंडिचेरी,तमिलनाडु की तरह इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाना चाहिए. मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,दिल्ली, हरियाणा,गुजरात,महाराष्ट्र सरकार के तहत मानदेय में बढ़ोत्तरी कर 15 हजार और साढ़े सात हजार मिलना चाहिए. आंगनबाड़ी की बहनों की उम्र सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष हो और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देते हुए उनके पेंशन,ग्रेच्युटी,पीएफ और मेडिकल सुविधा मिले.

उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा

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सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके आश्रित परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी मिलनी चाहिए. सेविकाओं की बहाली ग्राम सभा के बजाय परीक्षा लेकर करायी जानी चाहिए. गुजरात और बंगाल की तर्ज पर आंगनबाड़ी की बहनों को प्रति वर्ष एक बार एक माह के वेतन के बराबर बोनस दिया जाना चाहिए. सभा के उपरांत संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को 13 सूत्री मांग पत्र सुपुर्द किया. कार्यक्रम में बीएमएस के प्रदेश मंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद, केपी गुप्ता, धनबाद जिला मंत्री रुमा बनर्जी समेत दर्जनों पदाधिकारी मौजूद थे.

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