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आंगनबाड़ी पोषाहार को बताया बच्चों के लिए खतरनाक, देश के कई राज्यों में हुआ है विरोध

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Ranchi: झारखंड में सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय संवाद के दूसरे दिन विकास आयुक्त की उपस्थिति में अनुशंसा पेश की गई. इसमें पोषाहार में आ रही शिकायतों की भी जानकारी दी गई. इससे पूर्व प्रातः कालीन सत्र के दौरान काफी देर तक आंगनबाड़ी के पोषाहार की घटिया आपूर्ति पर चर्चा हुई. इस दौरान डॉ प्रशांत त्रिपाठी ने आंगनबाड़ी के माध्यम से पोषाहार के नाम पैकेट फ़ूड को काफी हानिकारक बताया. उन्होंने कहा कि यह फ़ूड बच्चों के लिए काफी नुकसानदेह है. इसे कोई उपयोग नहीं करना चाहता. उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में इसका विरोध हुआ है. इसके खिलाफ सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए.

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17 बिंदुओं को ध्यान में रखकर बनाएं योजना

झारखण्ड में एसडीजी संबंधी संवाद के दूसरे दिन झारखंड के विकास आयुक्त डीके तिवारी ने राज्य में एसडीजी के 17 बिंदुओं को ध्यान में रखकर योजना बनाने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि एसडीजी के रूप में हमारे सभी दायित्वों को सूत्रबद्ध कर दिया गया है. इसलिए सरकार और सिविल सोसाइटी को मिलकर एसडीजी को सर्वांगीण तौर पर लागू करने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने योजनाओं को धरातल तक ले जाने में झारखण्ड एसडीजी मिशन तथा अन्य संस्थाओं की पहल की सराहना की.

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संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम गोल के तहत 17 लक्ष्य

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के देशों द्वारा वर्ष 2015 से 2030 तक विश्व में सतत विकास के लिए 17 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल को झारखंड में लोकप्रिय बनाने तथा विभिन्न विकास योजनाओं में इन्हें ध्यान रखने की रणनीति बनाने पर चर्चा हुई. इसमें एसडीजी के लक्ष्य एक से छह तक पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया. इसमें गरीबी उन्मूलन, भुखमरी का खात्मा, बेहतर स्वास्थ्य, उन्नत शिक्षा, लैंगिक समानता और पेयजल व स्वच्छता शामिल है. एसडीजी का संकल्प है ‘कोई पीछे न छूटे’.

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कौन-कौन थे मौजूद

इस दौरान एसडीजी के लक्ष्यों को झारखंड में हासिल करने डॉ विष्णु राजगढ़िया और राजपाल ने अनुशंसा की प्रस्तुति की. इस सत्र का संचालन बलराम ने किया. डॉ सुरंजन, एके सिंह, नसरीन और गुरजीत ने भी विचार प्रस्तुत किए. कांके रोड स्थित विश्वा में यह आयोजन झारखंड एसडीजी मिशन, डब्ल्यूएचएच तथा अन्य संस्थाओं ने किया. प्रथम सत्र में प्रतिनिधियों ने एसडीजी के 17 लक्ष्यों पर समूह चर्चा के निष्कर्ष प्रस्तुत किए. इस सत्र का संचालन डब्ल्यूएचएच की कंट्री डायरेक्टर (इंडिया) निवेदिता वार्ष्णेय, छत्तीसगढ़ की संस्था समर्थन के मनीष श्रीवास्तव, मणिपुर विश्वविद्यालय के बबलू लोइटॉन्गबम, ओडिशा के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार मिश्र ने किया. कार्यक्रम में सस्मिता जेना, मधुकर सहित अन्य लोगों ने विचार रखे.

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इस संवाद में राज्य के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ ही अन्य राज्यों के अतिथि शामिल हुए.

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