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…और हाकिम का ही पैसा गटक गये बाबू

मामला राज्य के एक बड़े विभाग से है जुड़ा, पानी की उपलब्धता के नाम पर हो गया वारा-न्यारा

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Ranchi : राज्य की गलियों में इन दिनों हाकिम का ही पैसा गटक लिये जाने की चर्चा जोर-शोर से चल रही है. यह महकमा राज्य के गांव, शहर और अन्य जगहों पर पानी पिलाने और इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने का काम करती है. 24×7 पानी पहुंचाने का जिम्मा इसी महकमे के बाबुओं का है. इसी से जुड़े एक बाबू ने हजारीबाग अंचल में एक हजार ट्यूबवेल स्थापित करने का काम कराया. बाबू ने हाकिम के नाम पर प्रति ट्यूबवेल दो-दो हजार रुपये भी कॉन्ट्रैक्टर कंपनियों से लिये. इतना ही नहीं, समय पर रकम नहीं मिलने पर हाकिम के पीए और एक अन्य शख्सियत का धड़ल्ले से नाम तक लिया. इस बाबत 20 लाख रुपये इकट्ठा भी हुए. बाबू ने चुप्पी साध ली, जिससे इस कृत्य का हाकिम को पता ही नहीं चला. हाकिम के आवासीय कार्यालय अथवा मंत्रालय तक इसकी भनक भी लगी. योजना इसी वित्तीय वर्ष की है. ट्यूबवेल भी हाकिम के विधानसभा क्षेत्र और हजारीबाग के संसदीय इलाकों में लगाये गये हैं. तीन महीने में योजना को पूरा भी किया गया. हाकिम ने सांसद बनने की जुगत भी लगायी, पर सफल नहीं हो पाये. अब अपने विधानसभा क्षेत्र को चकाचक बना रखा है.

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हाकिम ने ले लिया बदला

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विभाग का कामकाज देख रहे मुखिया (हाकिम) ने अपने बाबू की करतूत का बदला जल्द ही ले लिया. विभाग में बाबुओं के हेड की प्रोन्नति का जब समय आया, तब उन्होंने अपना बदला ले लिया. दशहरा और इसके बाद बाबू अपनी प्रोन्नति के लिए दौड़े भी. हल्की-फुल्की खुराकी भी कार्यालय में दी. जब यह पता चला कि दवा-दारू करने और खुराकी देने का कोई खास फायदा नहीं हुआ, तो उनके नीचे से जमीन ही सरक गयी. अब हाथ मल रहे हैं. बाबू को इस बात का मलाल है कि काश हाकिम के हिस्से की मलाई उन तक पहुंच गयी होती, तो उनकी किस्मत और भी चमक जाती. अब उन्हें यह खल रहा है कि अब पछताये क्या होगा, जब चिड़िया चुग गयी खेत.

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