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आफत में अन्नदाताः अज्ञात बीमारी से मवेशियों की मौत, परेशान हैं चतरा के किसान

एक हफ्ते में पूरे जिले में तीन हजार पशुओं की मौत

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Chatra: चतरा के अन्नदाता इनदिनों दोहरी आफत झेल रहे हैं. लगातार तीन वर्षों से सुखाड़ की मार झेल रहे किसानों के समक्ष इस वर्ष भी खेती की समस्या उत्पन्न हो गई है. ऐसा नहीं है कि बारिश के अभाव में जिले के किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं. कमोवेश बारिश तो हुई है, लेकिन एक अज्ञात बीमारी ने अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ा दी है. दरअसल, अज्ञात बीमारी से मवेशियों की मौत हो रही है. एक सप्ताह के भीतर 12 बैलों की मौत ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी है.

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एक हफ्ते में तीन हजार पशुओं की मौैत

लगातार तीन वर्षों से सुखाड़ की मार झेल रहे चतरा के किसान इस साल भी समुचित खेती को लेकर आश्स्वत नहीं हैं. कारण है खेती के मौसम के आते हीं उनके मवेशियों की मौत होना. इस बीमारी से अबतक एक सप्ताह के भीतर जिले भर के करीब चालीस गांव में तीन हजार पशुओं की मौत हो चुकी है. वही मौत का कारण अबतक पता नहीं चल सका है. इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित पत्थल प्रखंड का एक दर्जन गांव है. जहाँ बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हो चुकी है. और मवेशियों के मरने से किसानों के समक्ष फिर से भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है. क्योंकि बैल नहीं होंगे तो किसान खेत कैसे जुतेगा, और खेती नहीं होगी तो परिवार का भरण पोषण कैसे होगा.

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कैसे करें खेती-किसान

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पत्थलगड्डा प्रखंड के एक किसान बताते हैं की वे इस बार भी खेती नहीं कर सकेंगे क्योंकि उनके खेती करने का सहयोगी बैल म़र चुके हैं. किसान ने बताया कि हल चलाने के दौरान अचानक उनके बैलों को चक्कर आता है और वे महज दो से तीन मिनट के भीतर काल के गाल में समां जाते हैं. उन्होंने बताया कि हल जोतने के दौरान उनके गांव में एक दिन में सात बैलों की मौत हो चुकी है. और यहां के अधिकांश किसान इतने अमीर नहीं हैं कि ट्रैक्टर से हल जोतकर खेती कर सकें. इस बीमारी से जहां अबतक करीब तीन हजार मवेशियों की मौत हो चुकी है. वहीं करीब दो हजार मवेशी बीमार हैं.

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