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महागठबंधन में सीटों की दावेदारी पर फंस सकता है पेंच, भाजपा भी भांप रही हवा का रुख

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Ranchi : लोकसभा चुनाव-2019 की तैयारी कमोबेश सभी राजनीतिक दलों ने शुरू कर दी है. विपक्षी दल महागठबंधन की बात कर रहे हैं. लेकिन, सीटों की दावेदारी को लेकर बड़ा पेंच फंस सकता है. इस वजह से भाजपा भी हवा का रुख भांप रही है. भाजपा झारखंड में लोकसभा की सभी सीटों पर कब्जा जमाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियां गिना रही है. बूथ स्तर पर पहले से ही तैयारी शुरू है. भाजपा महागठबंधन में सेंधमारी करने के भी मूड में है.

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गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी पेंच की बड़ी वजह

गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी पेंच की बड़ी वजह है. हालांकि, विपक्षी दल संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का दावा तो कर रहे हैं और इसके लिए सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा कम सीटों की दावेदारी कर गठबंधन के साथ चलने के मूड में है. झामुमो को विधानसभा में अधिक से अधिक सीटों की दरकार है. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस महागठबंधन को लीड करना चाहती है. इस वजह से वह भी अधिक से अधिक सीटों पर दावा ठोकने के मूड में है.

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क्या है विपक्षी दलों के महागठबंधन का फॉर्मूला

राजनीतिक जानकारों की मानें, तो कांग्रेस लोकसभा की सात सीटों पर दावेदारी कर रही है. झामुमो को चार सीट देने पर सहमति बनी है. झारखंड विकास मोरचा को दो सीट देने की बात सामने आ रही है. वहीं, राजद को एक सीट दिये जाने की बात है.

कब किस पार्टी ने चुनाव जीता

13वीं लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोरचा का हुआ सफाया

1999 में हुए 13वीं लोकसभा के चुनाव में राज्य की 14 सीटों से झारखंड नामधारी दलों का सफाया हो गया था. झारखंड मुक्ति मोरर्चा एक भी सीट नहीं जीत सका. भारतीय जनता पार्टी ने धनबाद, हजारीबाग, रांची, गिरिडीह, जमशेदपुर, सिंहभूम, खूंटी, लोहरदगा, पलामू, गोड्डा, दुमका की सीट जीती थी, वहीं दो सीटों पर कांग्रेस कोडरमा और राजमहल एवं एक सीट पर चतरा से आरजेडी ने चुनाव जीता था.

भाजपा को 14वीं लोकसभा चुनाव में एक सीट हाथ लगी

2004 में 14वीं लोकसभा चुनाव में राज्य से बीजेपी का लगभग सफाया हो चुका था. बीजेपी मात्र एक सीट पर ही चुनाव जीत पायी और उस जीत का कारण यूपीए से अलग रखी गयी पार्टी माले बनी. कोडरमा सीट से बाबूलाल मरांडी ने चुनाव जीता था. झारखंड मुक्ति मोर्चा 211712 मत लाकर दूसरे स्थान पर रहा. वहीं, सीपीआई एमएल के उम्मीदवार राजकुमार यादव ने 136554 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. अगर यूपीए फोल्डर में माले भी शामिल होती, तो संभवतः 14वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को झारखंड से कोई सीट नहीं मिलती. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चार सीटों पर चुनाव जीता, जिनमें राजमहल, दुमका, गिरिडीह और जमशेदपुर की सीटें रहीं. कांग्रेस ने छह सीटों पर चुनाव जीता, जिनमें गोड्डा, धनबाद, रांची, लोहरदगा, की सीटें भी शामिल थीं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने दो सीटों पर विजय प्राप्त की, जिनमें चतरा और पलामू सीट शामिल थीं एवं सीपीआई हजारीबाग सीट पर विजयी हुई.

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15वीं लोकसभा में दो निर्दलीय उम्मीदवार जीते

2009 में 15वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आठ सीटों पर विजय हासिल की थी, जिनमें राजमहल, गोड्डा, गिरिडीह, धनबाद, जमशेदपुर, खूंटी, लोहरदगा एवं हजारीबाग की सीटें थीं. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दो सीटों पर चुनाव जीता था, जिसमें दुमका और पलामू की सीट शामिल थी. झारखंड विकास मोर्चा ने कोडरमा सीट से और कांग्रेस ने रांची सीट पर विजय हासिल की थी. दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीता था, जिनमें चतरा सीट से इंदर सिंह नामधारी और सिहंभूम सीट से मधु कोड़ा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे.

16वीं लोकसभा चुनाव में राज्य से कांग्रेस का सफाया

2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव भाजपा के लिए बेहतर साबित हुआ. इसमें मोदी लहर ने तो कांग्रेस का सफाया ही कर दिया. हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी दो सीटें बचाने में कामयाब रहा. राजमहल और दुमका सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार जीते. वहीं, बाकी 12 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की.

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