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आदिवासी अधिकारों को लागू कराने को लेकर एक मंच पर जुटे बुद्धिजीवी

अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है.

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Ranchi : शेड्यूल एरिया में पंचायती राज अधिनियम लागू नहीं और आदिवासी अधिकारों की बात करते हुए आदिवासी समाज का बुद्धिजीवी वर्ग रविवार को एक कार्यक्रम में शामिल हुआ. यह कार्यक्रम झारखंड विकास मोर्चा के बैनर तले आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार, कानूनी एवं नीतिगत पहलुओं पर चर्चा करने को लेकर आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में उपस्थित झामुमो विधायक दीपक बिरूवा ने कहा कि इसके कारण अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है. साथ ही राज्य में जब से यह अधिनियम लागू हुआ है कि तब से ग्राम सभा की शक्तियां पूरी तरह से समाप्त हो गयी है.

बैठक में पार्टी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस के लोहरदगा विधायक सुखदेव भगत, कांग्रेसी नेता रामेश्वर उरांव, ट्राइबिल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सदस्य रतन तिर्की सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.

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ग्राम सभा की शक्तियां हो रही कम

झामुमो विधायक ने कहा कि 2010 को लागू पंचायती राज्य कानून के कारण आज शेड्यूल एरिया के लोगों को काफी परेशानी झेलने पड़ रही है. यह सभी जानते हैं कि शेड्यलू एरिया में यह कानून लागू नहीं हो सकता है, इसके बावजूद यह कानून लागू किया गया है. विधानसभा में पंचायती राज्य समिति चेयरमेन होने के दौरान उन्होंने देखा था कि अधिनियम के धारा 10(8) के तहत भी प्रावधान किया गया है. इसके विपरीत जबसे शेड्यूल एरिया में पंचायती राज कानून लागू किया गया, तब से यहां ग्राम सभा की शक्तियां समाप्त हो गयी. शेड्यूल एरिया में सरकार के इस निर्देश से ग्राम सभा की शक्तियां प्रभावित हो रही है.

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आरक्षण से वंचित रख रही है सरकार

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संवैधानिक आरक्षण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों को किसी भी जिले में नियुक्ति प्रकिया उसके जनसंख्या के हिसाब से की जानी है. ऐसा होने पर आरक्षण का लाभ सबसे ज्यादा लाभ इन्हीं वर्ग को मिलता. नियुक्ति प्रकिया हेतु राज्य के प्रत्येक जिले में स्थापना समिति का प्रावधान था. इस समिति के कारण सबसे ज्यादा नियुक्ति इन्हीं वर्ग को लोगों को मिलती.

लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि सरकार ने अब स्थापना समिति को बदलकर कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से नियुक्ति प्रकिया शुरु कर दी है. इससे एक तरह से राज्य में आदिवासियों को मिलने वाले 26 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पूरी तरह से समाप्त हो गया है.

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आदिवासी हित की बात पर आयोजित इस कार्यक्रम में आदिवासी हित से जुड़े बुद्धिजीवी वर्ग के बीच निम्न बातों की चर्चा की गयी

  • सरना आदिवासी कोड को लागू करना
  • आदिवासियों को उनके संवैधानिक पहलुओं के संबंध में विशेष जानकारी देने का प्रयास करना
  • सीएटी कानून में बदलाव के संदर्भ में (इसके तहत थाना क्षेत्र की बाध्यता को समाप्त करने की बात कही गयी थी, इसके संबंध में टीएसी की उपसमिति का भी गठन किया गया था)
  • सरना आदिवासी एवं ईसाई आदिवासियों को बांटने की हो रही साजिश पर लोगों को जागरुक करना,
  • झारखंडी महापुरुषों को पाठ्य-पुस्तक में शामिल करना
  • राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में 5500 विद्यालय के विलय कर देने और 7500 विद्यालयों को विलय करने की प्रकिया जैसे मुद्दे पर आदिवासियों पर पड़ रहे प्रभाव
  • जनजाति उपयोजना की राशि को दूसरी मद में खर्च किये जाने के मुद्दे पर चर्चा
  • राज्य में आदिवासी छात्रावासों की जर्जर स्थिति पर सरकार को जागरुक करना, ताकि आदिवासी छात्रों के भविष्य पर कोई परेशानी नहीं हो
  • सरकार द्वारा आदिवासी छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति में कटौती करने का प्रयास

 

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