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हजारीबाग के एक इंजीनियर ने संवार दी पूरे गांव की तस्वीर, गूंज पीएमओ तक

Praveen Munda

Ranchi : हजारीबाग के चौपारण प्रखंड स्थित दैहर गांव के अमितेश (पेशे से इंजीनियर) ने जो काम किया है, उसकी वजह से उनकी चर्चा आज पूरे राज्य में ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें सराहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा है- अमितेश कुमार, आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र ने एक प्रोजेक्ट बनाया है, जिससे वह झारखंड स्थित अपने गांव दैहर को राज्य का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट गांव में बदलना चाहते हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमितेश की चर्चा मन की बात में भी करना चाहते हैं. शायद बहुत जल्द हम-आप उनके बारे में सुन सकेंगे.

अब वह बात, जो लोग जानना चाहते हैं. आखिर इस व्यक्ति ने ऐसा क्या कर दिया, जिसकी वजह से प्रधानमंत्री भी उनकी चर्चा कर रहे हैं? दरअसल, किसी एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति से भी किसी जगह की तस्वीर कैसे बदल सकती है, यह उसकी बानगी है.

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ग्रीन स्मार्ट गांव में तब्दील होनेवाला है अमितेश का गांव

लेकिन, पहले अमितेश के गांव दैहर के बारे में जान लें. दैहर हजारीबाग के चौपारण प्रखंड में पड़ता है. हजारीबाग शहर से करीब 55 किलोमीटर दूर. गांव की आबादी करीब पांच हजार है. गांव तक सड़क बनी है, लेकिन जर्जर है. 50 प्रतिशत लोगों के पास पेयजल के लिए अपने स्रोत (कुआं) या चापानल नहीं है. वे पानी के लिए इधर-उधर भटकते थे. पर, अब यह गांव हरित स्मार्ट गांव में तब्दील होनेवाला है. यहां पर पक्की सड़कें होंगी. गांव में 50 पक्के मकान बननेवाले हैं. पेयजल की व्यवस्था हो चुकी है. स्ट्रीट लाइट लगनेवाले हैं. इसके अलावा अस्पताल भी बनेगा और पौधारोपण भी किया जाना है.

हजारीबाग के एक इंजीनियर ने संवार दी पूरे गांव की तस्वीर, गूंज पीएमओ तक

कई कंपनियां दे रहीं अमितेश का साथ

अमितेश यह काम अपने दैहर स्मार्ट विलेज एंड ग्रीन फील्ड के तहत कर रहे हैं. उनके प्रयासों को कई बड़ी कंपनियों का साथ मिला है. ओएनजीसी, ओला, टाटा पावर, रिलायंस और इंडियन ऑयल इनमें शामिल हैं. इनमें ओएनजीसी ने अभी तक 20 लाख रुपये दे दिये हैं. रिलायंस ने भी अमितेश के प्रोजेक्ट को अप्रूव किया है.

अमितेश बताते हैं कि रिलायंस ने गांव में विकास कार्यों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने पर सहमति दी है. कुल मिलाकर अभी तक अमितेश के प्रोजेक्ट में विभिन्न कंपनियों से चार करोड़ रुपये की फंडिंग विकास कार्य के लिए हुई है. कई और कंपनियों के पास प्रस्ताव भेजा गया है. अमितेश को उम्मीद है कि और कंपनियां भी उनके काम से जुड़ेंगी.

अमितेश को इस काम के लिए उनकी टीम से काफी मदद मिल रही है. टीम में आईआईटी मुंबई, आईआईएम अहमदाबाद के सहयोगी हैं. इनमें शिखा पंडित, आकांक्षा पंडित, आकाश कुमार, दिव्या पुरी, काजल कुमारी आदि शामिल हैं.

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ऐसे हुई थी शुरुआत

अमितेश बताते हैं कि कोरोना के दौरान वह मुंबई से हजारीबाग स्थित अपने गांव आये हुए थे. लॉकडाउन की वजह से दो-तीन महीने तक गांव में ही रहना पड़ा. उस समय देखा कि लोग गांव में पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. इससे पहले अपने घर से दूर जाकर कुएं से पानी लाने के क्रम में एक महिला की मौत डूबकर हो जाने की खबर भी सुनी थी. तब पानी की समस्या दूर करने के लिए काम किया.

इसके बाद गांव के लोग आये और कई तरह की समस्याओं की जानकारी दी. उन्हें लगा कि मैं उनकी समस्याओं को दूर कर सकता हूं. अब अलग-अलग फेज में गांव के विकास का काम होगा. फेज वन में गांव में पेयजल के लिए साफ पानी और पौधारोपण का काम हो गया है. फेज टू में करीब 50 पक्के मकान बनाकर गरीब लोगों को देना है. फेज तीन में अस्पताल, स्कूल और स्ट्रीट लाइट लगेंगे.

बता दें कि अमितेश इंजीनियर हैं और ओएनजीसी मुंबई में कार्यरत हैं. उनकी स्कूल और इंटर तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से ही हुई. रांची में आकर आईआईटी की तैयारी की. मेरठ से बीटेक किया. इसके बाद गेट की तैयारी की. आईआईटी मुंबई में आगे की पढ़ाई की.

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