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अडाणी को लाभ पहुंचाने के लिए एक खास क्षेत्र को स्पेशल इकोनामिक जोन घोषित कर दिया

केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार कॉरपोरेट की हैः बाबूलाल मरांडी

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Ranchi: झारखंड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मारंडी ने गोड्डा में केन्द्र सरकार द्वारा स्पेशल इकोनामिक जोन घोषित करने पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और कहा, भाजपा सरकार आम-अवाम की सरकार नहीं है. यह पूरी तरह कॉरपोरेट घरानों के लिए काम करने वाली सरकार है. देश के एक औद्योगिक घराने के लिए झारखंड को नहीं,  गोड्डा को नहीं बल्कि केवल एक कम्पनी को स्पेशल इकोनामिक जोन घोषित करके केंद्र सरकार ने इस पर मुहर लगा दिया है. गोड्डा में जहां पर अडाणी पावर प्लांट सरकार लगा रही है, शुरू से ही सरकार की मंशा रही है कि कैसे यहां पर अडाणी को अधिक मुनाफा हो. इसके लिए सरकार ने कई नियम-कानून को बदल डाला. पूर्व उपायुक्त ने जहां जमीन की कीमत 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तय की थी, उसे घटाकर इस सरकार ने महज सवा तीन लाख प्रति एकड़ कर दिया. झारखंड विकास मोर्चा के द्वारा सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन व संघर्ष के बाद जमीन की कीमत 12-13 लाख रुपए प्रति एकड़ हुई. अब जाकर 2013 के जमीन अधिग्रहण कानून के अनुसार चार गुना यानी जमीन की कीमत 50-52 लाख प्रति एकड़ मिल रही है. भाजपा ने 2012 में सरकार के द्वारा बनायी गयी ऊर्जा नीति का भी उल्लंघन अडाणी को लाभ पहुंचाने के लिए किया है. इस ऊर्जा नीति में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि झारखंड में कोई भी पावर प्लांट लगाएगा तो उसे 25 फ़ीसदी बिजली इस राज्य को देनी होगी. इसके अलावा भी कुछ नियम थे. परन्तु इन्होंने इसे समाप्त कर दिया और 100 फ़ीसदी बिजली बांग्लादेश को देने का फैसला किया है.

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चुनाव में लाभ लेने के लिए लिया गया फैसला

श्री मरांडी ने कहा कि आज जो अखबारों में पढ़ा उसमें भाजपा सरकार ने गोड्डा जिला को नहीं, झारखंड को नहीं बल्कि सिर्फ एक औद्योगिक घराने के लिए सेज बनाया है. सिर्फ एक औद्योगिक घराना अडाणी को लाभ पहुंचाने के लिए इस इलाके को SEZ श्रेणी में लाया गया है. ताकि इस कंपनी को टैक्स सहित अन्य सुविधा में भी छूट दी जा सके. स्वभाविक है कि बीजेपी ने 2019 चुनाव को देखते हुए यह फैसला लिया है ताकि कंपनी की ओर से उन्हें एक बड़ी रकम मुहैया करायी जाये. स्पष्ट है कि भाजपा सिर्फ और सिर्फ कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है. यह मुद्दा केवल गोड्डा का नहीं है बल्कि हम इस पूरे झारखंड का मुद्दा बनायेंगे. और इसे एक बड़ी लड़ाई का रूप देकर जनता की अदालत में भाजपा को बेनकाब करेंगे.

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इससे झारखंड को कितना नुकसान होगा  

गोड्डा में अडाणी पावर प्लांट के लिए नियम कायदों को बदल दिया गया. जिस इलाके में पावर प्लांट का प्रस्ताव है वो पूरा इलाका बहु फसली और कृषि प्रधान है. साथ ही, बहुसंख्यक स्थानीय आदिवासी, किसानों की आजीविका का यह मुख्य साधन है. इस परियोजना से राज्य की सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 294 करोड़ के  राजस्व की क्षति होगी. झारखण्ड महालेखाकार परियोजना पर सवाल खड़ कर चुका है. वहीं, दुनिया में ऊर्जा क्षेत्र से सम्बंधित परियोजनाओं के आर्थिक, सामाजिक मापदंडों का अध्ययन करनेवाली ”इंस्टिट्यूट फॉर एनर्जी इकोनोमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालासिस ने भी इस पवार प्लांट प्रोजेक्ट को बांग्लादेश के लिए महंगा, खतरनाक और देर से शुरू होने वाला प्रोजेक्ट करार दिया है. इस परियोजना से सिर्फ अडाणी कंपनी को फायदा होगा. इसको लेकर झाविमो के द्वारा आंदोलन भी किया जाता रहा है.

क्या है विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा SEZ

विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा सेज उस भौगोलिक क्षेत्र को करते हैं जहां से व्यापार आर्थिक क्रियाकलाप उत्पादन तथा अन्य व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है. यह क्षेत्र देश की सीमा के भीतर विशेष आर्थिक नियम कायदों को ध्यान में रखकर व्यवसायिक गतिविधियां को के लिए विकसित किये जाते हैं. केंद्र सरकार ने 2005 में इससे संबंधित अधिनियम पारित किया था. भारत में बने एसईजेड अपने लक्ष्य को नही पा सके.   2014-15 से कई एसईजेड की मंजूरी मिलने के बाद भी निर्यात में गिरावट आयी है.

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