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आमया ने केंद्र को किया आगाह- ‘भीड़’ मंदिर बनाने का कर सकती है प्रयास

अयोध्या निवासी ने सरकार को पत्र लिखकर दी जानकारी- 25 नवंबर को धर्म सभा के नाम पर अयोध्या में भीड़ लगायी जायेगी

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Ranchi : अयोध्या का बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामला काफी गंभीर मामलों में से एक है. देश के हर वर्ग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण फैसलों में से एक होगा, जिस पर हर किसी की नजर होगी. उक्त बातें ऑल मुस्लिम यूथ एसोसिएशन (आमया) के केंद्रीय अध्यक्ष एस. अली ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद के पक्षधर अयोध्या निवासी इकबाल अंसारी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया है कि धर्म सभा के नाम पर 25 नवंबर को अयोध्या में भीड़ लगायी जा रही है. इससे वहां के लोगों में डर है और सुरक्षा नहीं मिलने पर वे अयोध्या छोड़ देंगे. अली ने बताया कि इकबाल ने भारत सरकार को यह भी बताया है कि 1992 की घटना की तर्ज पर भीड़ मंदिर बनाने का प्रयास कर सकती है, इसलिए केंद्र सरकार भीड़ पर रोक लगाये.

सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान

वार्ता के दौरान अली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2019 में मामले की सुनवाई की तारीख तय करनेवाला है.  ऐसे में कई संगठनों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि न्यूज चैनल भी इस पर लाइव डिबेट करवाकर सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दे रहे हैं. लाइव प्रसारण देखने से लगता है कि न्यूज एंकर ही जज की भूमिका निभा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इस पर संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे, क्योंकि ऐसे संगठन ही बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर दो गुटों में आग लगा रहे हैं.

सोची-समझी साजिश की गयी थी

आदिवासी जनविकास परिषद के रंजीत उरांव ने कहा कि सोची-समझी साजिश के तहत सैकड़ों वर्ष पुरानी मस्जिद को तोड़ा गया. उरांव ने जस्टिस लिब्राहन अयोध्या कमीशन, जस्टिस कृष्णा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है, वहीं 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले पर बीजेपी, आरएसएस, वीएचपी, शिव सेना जैसे संगठन से जुड़े 49 मुख्य लोगों सहित अन्य पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी, लेकिन कानूनी दांव-पेंच में दोषी बच गये.

रिपोर्ट को करें सुनवाई में शामिल

प्रेस वार्ता के दौरान आमया और आदिवासी जनविकास परिषद की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मांग की गयी कि जस्टिस लिब्राहन कमीशन और जस्टिस कृष्णा कमीशन की रिपोर्ट को भी जनवरी में होनेवाली सुनवाई में शामिल किया जाये, ताकि दोषियों पर कर्रवाई हो, जिससे देश के संविधान, कानून और सिद्धांत की गरिमा बनी रहे. मौके पर मौलाना फजलुल कदीर अहमद, कृष्णा कच्छप जियाउद्दीन अंसारी, श्याम टोप्पो, मो फुरकान, एकराम हुसैन, आफताब गद्दी, रमजान कुरैशी, अदीब अशर्फी, मो समी, तौकीर मलिक, शाकील अंसारी समेत अन्य मौजूद थे.

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