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भूलने की बीमारी ने पहुंचा दिया स्पेशल ओलंपिक, तीन कांस्य जीतकर लौटी लेकिन नहीं याद आया घर, दिलचस्प है अस्मिता की कहानी

तीन साल बाद घर लौटी तो लातेहार डीसी ने किया सम्मानित

Ranchi/Latehar: यह एक ऐसी लड़की की अनूठी कहानी है जिसे भूलने की गंभीर बीमारी है. उस लड़की ने अबू धाबी में आयोजित स्पेशल ओलंपिक 2019 में तीन कांस्य जीतकर भारत का नाम रोशन किया. लेकिन उसे ना तो अपने घर का पता याद रहा ना ही अपने माता-पिता. जीत का जश्न तो था लेकिन इस कामयाबी पर इतराने वाले अपने ना थे. तीन साल बाद उसे अपने घर की याद आयी. एक अफसर को उसने बताया कि उसका घर झारखंड के लातेहार में हैं. आज का दिन उसके लिए स्पेशल रहा खुद उपायुक्त लातेहार ने उसे सम्मानित किया.

ये कहानी है लातेहार जिले बालूमाथ प्रखंड के हेमपुर गांव की रहने वाली अस्मिता कुमारी की. छोटे से गांव से निकलकर अस्मिता के एथलीट बनने का सफर बड़ा ही रोचक है. करीब 10 साल पहले जब उसकी उम्र तकरीबन 10 से 11 साल के बीच रही होगी. उसकी एक रिश्तेदार ने अस्मिता को डोमेस्टिक हेल्प के रूप में कार्य कराने को दिल्ली लेकर गयी थी जहां उसने उसे छोड़ दिया था.

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बौद्धिक अक्षमता की वजह से अस्मिता अपने गांव का नाम भी बता पाने में असमर्थ थी. इसके बाद उसे दिल्ली के आशा किरण शेल्टर होम कॉम्प्लेक्स में रखा गया था.

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यहां उसने पावरलिफ्टिंग करना शुरू किया. अपनी मेहनत और लगन के बल पर उसे अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात) में आयोजित Special Olympics World Summer Games -2019 में पावरलिफ्टिंग में शामिल होने का मौका मिला. इसमें उसने बेहतरीन प्रदर्शन कर तीन कांस्य पदक जीता. अस्मिता ने फरवरी 2022 में आशा किरण शेल्टर होम के वेलफेयर ऑफिसर के सामने अपने गांव का नाम लिया.

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इसके बाद दिल्ली एवं झारखण्ड सरकार के पदाधिकारियों के संयुक्त प्रयास से उसे उसके घर भेजा गया. हालांकि अस्मिता के पिता को उस रिश्तेदार के बारे में कोई जानकारी नहीं है जो उसे अपने साथ दिल्ली लेकर गए थे. आज उसे लातेहार डीसी अबू इमरान ने सम्मानित किया. मौके पर कहा कि अस्मिता की उपलब्धि प्रशंसनीय है. आधार कार्ड के अनुसार अस्मिता कुमारी 22 साल की है.

उन्होंने अस्मिता की लातेहार वापसी एवं माता-पिता से पुन: मिलने पर ख़ुशी जाहिर की. कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा अस्मिता को प्रशिक्षण के लिए लातेहार में सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी.

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