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#delhivoilence : गृहमंत्री के रुप में अमित शाह की तीसरी बड़ी विफलता!

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Surjit Singh

तीन दिन से दिल्ली जल रहा है. कई इलाकों में दंगे हुए. कर्फ्यू लगाना पड़ा. अंतिम सूचना यह है कि एक पुलिसकर्मी समेत दंगे में 17 लोग मारे गये. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने का अनुमान है. 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. करोड़ों की संपत्ति जला दी गयी. कुल मिलाकर रविवार, सोमवार व मंगलवार को दिल्ली बेलगाम होती दिखी.

हर तरफ से एक ही सवाल है. दिल्ली के इस हालात के लिए कौन है जिम्मेदार. सीएए के विरोधी, सीएए के समर्थक, भाजपा नेता कपिल मिश्रा, दिल्ली पुलिस या केंद्रीय गृह मंत्रालय. जवाब जो भी हो. पर, देश की राजधानी दिल्ली में तीन दिनों तक यह सब होता रहा. दिल्ली की घटना गृह मंत्री के रुप में अमित शाह की तीसरी बड़ी विफलता है. वह भी सिर्फ नौ माह के कार्यकाल में.

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गृह मंत्री के रुप में अमित शाह की पहली बड़ी विफलता तब मानी गयी थी. जब दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच संघर्ष हुआ था. कोर्ट परिसर में पुलिस की पिटाई हुई थी. महिला आइपीएस अफसर का हथियार छीन लिया गया था और उनके अलावा सहयोगियों के साथ मारपीट की गयी थी.

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गृह मंत्री के रुप में अमित शाह की दूसरी बड़ी विफलता सीएए को लागू कराने के दौरान सामने आयी. सबसे पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में आंदोलन शुरु हुआ. जिसके बाद देशभर में अलग-अलग कारणों से सीएए के खिलाफ आंदोलन जारी है.

माना जा रहा है सीएए की वजह से भाजपा कुछ हद तक हिन्दु वोटरों को जरुर साधने में सफल रही हो. लेकिन इससे भाजपा को भारी नुकसान हो रहा है. एक-एक कर राज्यों से भाजपा के पांव उखड़ रहे हैं.

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अब गृह मंत्री के रुप में अमित शाह की तीसरी बड़ी विफलता दिल्ली में दंगे के रुप में सामने है. गृह मंत्रालय के कंट्रोल में काम करने वाली दिल्ली पुलिस कपिल मिश्रा के भड़काउ भाषण के दौरान चुप रही. जब हिंसा भड़की, तब भी दो दिनों (रविवार और सोमवार को) तक पुलिस दवाब में ही नजर आयी. जिसका परिणाम बड़ी हिंसा के रुप में सामने है.

नौ माह के भीतर तीसरी बार देश ने देखा कि आपातकालीन स्थिति में गृह मंत्री अमित शाह और गृह मंत्रालय ने प्रतिक्रिया करने में देर की. जिस कारण स्थिति बिगड़ी. क्या यह सब यूं ही हो रहा है. या इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति काम कर रही है?  क्या कानून-व्यवस्था को सामान्य रखने के मामले में गृह मंत्रालय की नियत पक्षपात वाला है? जिस कारण पुलिस कार्रवाई करने के दौरान असमंजस की स्थिति में नजर आती है.

कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि अमित शाह दिल्ली समेत देशभर में गुजरात मॉडल लाना चाह रहे हैं. ऐसा कहते वक्त लोग गुजरात दंगों को याद करते हैं.

बात चाहे जो भी हो. अगर हर बार गृह मंत्रालय इसी तरह असमंजस वाली स्थिति में रहेगी. समय पर कार्रवाई नहीं करेगी. तो अमित शाह देश के सबसे विफल मंत्रियों में से एक साबित होंगे.

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