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अमित शाह ने चुनावी रैली में कहा, पंडित नेहरू ने संघर्ष विराम नहीं कराया होता, तो #POK का अस्तित्व नहीं होता

Mumbai :  गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को  पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को अस्तित्व में लाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पंडित नेहरू ने बेवक्त पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की होती तो POK अस्तित्व में ही नहीं आता.

इस क्रम में शाह ने कश्मीर का भारत में एकीकरण नहीं करने को लेकर नेहरू पर हमला बोलते हुए कहा कि इस मुद्दे को, नेहरू के बदले देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को अपने हाथों में लेना चाहिए था.

कश्मीर का विलय नहीं करा सके नेहरू

शाह ने कहा कि जिन रियासतों के विलय की जिम्मेदारी सरदार वल्लभ भाई पटेल को दी गयी थी, उन सभी का सफलता से विलय हो गया, लेकिन जिस एक रियासत का जिम्मा पंडित नेहरू पर छोड़ा गया, वही भारत में शामिल नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि कश्मीर के महाराजा ने विलय से इनकार कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान ने 20 अक्टूबर, 1947 को कश्मीर पर कबाइलियों के रूप में हमला कर दिया.

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जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने के केंद्र के फैसले और अगले महीने यहां होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यहां एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, कांग्रेस अनुच्छेद 370 की समाप्ति के पीछे राजनीति देखती है जबकि भाजपा इस तरह से नहीं सोचती है.

उन्होंने कहा,  पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अस्तित्व में ही नहीं आता अगर नेहरू ने बेवक्त पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की होती.  नेहरू के बदले सरदार पटेल को यह मुद्दा अपने हाथ में लेना चाहिए था.  शाह ने कहा, अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद कश्मीर में एक भी गोली नहीं चलाई गयी है.

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कश्मीर में कोई अशांति नहीं है

उन्होंने कहा कि कश्मीर में कोई अशांति नहीं है और आने वाले दिनों में आतंकवाद समाप्त हो जायेगा.  बिना किसी का नाम लिये   शाह ने कहा कि कश्मीर में जिन तीन वंशों ने शासन किया उन्होंने वहां भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो भी स्थापित नहीं करने दिया. उन्होंने कहा,  कश्मीर में जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं.  उन्हें ठंड में भी पसीने छूट रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा सुप्रीमो शरद पवार को यह बताना चाहिए कि वह अनुच्छेद 370 की समाप्ति के पक्ष में हैं या इसका विरोध करते हैं.  कहा कि महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव के बाद देवेंद्र फडणवीस दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे.  राज्य में एक चरण में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और परिणाम की घोषणा 24 अक्टूबर को होगी.

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