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अमित शाह जी! जरा पता कीजियेगा, जिस भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों के आवास के लिए आपने भूमि पूजन किया था, क्या वहां एक भी ईंट लग पायी है

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Akshay Kumar Jha

Ranchi : 17 सिंतबर 2017 को रांची से लेकर खूंटी के उलिहातू तक भगवा लहरा रहा था. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू पहुंचे थे. वहां पहुंचते ही उन्होंने शहीद ग्राम विकास अंतर्गत आवास योजना का भूमि पूजन भगवान बिरसा मुंडा के आंगन में किया था. कल्याण विभाग की तरफ से इस योजना के तहत उलिहातू में 136 आवास बनने थे. इन आवासों को गांववालों के बीच बांटना था. अब 10 महीने बीतने को हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस दौरान दोबारा झारखंड का दौरा करनेवाले हैं. 11 जुलाई को वह एक दिवसीय दौरे पर झारखंड आ रहे हैं. लेकिन गौर करनेवाली बात यह है कि अब तक उलिहातू में अमित शाह के भूमि पूजन के बाद उक्त योजना के तहत एक भी ईंट नहीं लग पायी है. जैसा नजारा 17 सितंबर 2017 को था, वैसा ही नजारा आज भी है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उलिहातू गांव की सुध लेंगे. क्या वह पता करना चाहेंगे कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांववालों से जो वादा उन्होंने किया था, उस वादे का क्या हुआ?

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सरकार नहीं कर पायी समस्या का समाधान

कल्याण विभाग की योजना है कि राज्य के शहीदों के गांवों में आवास बनाकर दिया जायेगा. सरकार की योजना के मुताबिक, कल्याण विभाग की तरफ से झारखंड में आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी, जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातू का है. योजना की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातू से की. दरअसल योजना के मुताबिक 8×9 फीट के दो कमरे, 6×6.6 फीट का एक किचन, 7×6.6 फीट का एक बरामदा, 4×4 का बाथरूम और 4×3 फीट का WC (Water Closet) यानी ट्वॉयलेट वाला एक मॉडल मकान बनाकर दिया जाना था. लेकिन, गांववालों ने इस मॉडल का विरोध किया. उनका कहना है कि इतने छोटे-छोटे मकान कबूतरखाने की तरह हैं. उन्हें चार कमरे का 15×12 फीट कमरेवाला मकान चाहिए. इस बात को लेकर उलिहातू गांव में कई बार ग्राम सभा हुई. ग्राम सभा में प्रशासन की तरफ से भी अधिकारी पहुंचे, लेकिन बीच का रास्ता आज तक नहीं निकाला जा सका है.

इस मर्ज की दवा सरकार और विभाग के पास नहीं

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जो मकान बनाकर दिया जाता है, उसपर सरकार का खर्च 1.30 लाख रुपये आता है. सरकार ने शहीदों के लिए इस खर्च को बढ़ाकर 2.63 लाख रुपये कर दिया. इसके तहत मॉडल मकान बनाकर शहीदों के गांववालों को दिया जाना था. उलिहातू में जिस तरह के मकान की डिमांड शहीद के गांववाले कर रहे हैं, प्रशासन उस पर लागत करीब 17 लाख रुपये बता रहा है. जबकि न्यूज विंग ने कुछ इंजीनियरों से बात की, तो खर्च मॉडल मकान का ज्यादा-से-ज्यादा तीन गुना होने का अनुमान लगाया गया. ऐसे में सरकार पसोपेश में फंसी है कि आखिर किया क्या जाये.

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सरकार खोज रही है ऐसा रास्ता

सरकार को उलिहातू शहीद ग्राम योजना के तहत 136 मकान बनाने हैं. अगर सरकार गांववालों की बात मानती है, तो सरकार पर करोड़ों का खर्च आयेगा, साथ ही दूसरे शहीद ग्राम के लोग भी इस तरह की मांग कर सकते हैं. ऐसे में सरकार बीच का रास्ता चाह रही है. उलिहातू में भगवान बिरसा मुंडा के 16 परिजन हैं और सरकार कुछ ऐसा करना चाहती है, जिससे इन 16 परिजनों को खुश किया जा सके. इन 16 परिजनों के लिए सरकार दूसरा मॉडल मकान तैयार करने की सोच रही है.

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नहीं मानी जा सकती उलिहातू गांववालों की बात : मंत्री लुईस मरांडी

मामले पर कल्याण विभाग की मंत्री डॉ. लुईस मरांडी से न्यूज विंग से बात की. उनका कहना है कि झारखंड के दूसरे शहीद गांवों में काम हो रहा है. उलिहातू में गांववालों की मांग ऐसी है, जो मानी नहीं जा सकती. अगर एक शहीद गांव की बात मानी जायेगी, तो दूसरे शहीद गांव के ग्रामीण भी इस तरह की मांग कर सकते हैं. इसलिए उनकी बात नहीं मानी जा सकती है. योजना जैसी तैयार की गयी है, वैसी ही रहेगी. इसमें छेड़छाड़ करना सही नहीं है.

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