Opinion

PMO में अमित खरे की नियुक्ति रघुवर दास को चोट है या उनका प्रायश्चित!

Anand Kumar

झारखंड कैडर के आइएएस अधिकारी अमित खरे को पीएमओ में सलाहकार बनाया गया है. अमित खरे की पहचान तेजतर्रार ईमानदार आइएएस के रूप में है, लेकिन इससे भी ज्यादा वे चारा घोटाले का खुलासा करनेवाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं. चाईबासा के उपायुक्त रहते हुए अमित खरे ने अरबों रुपये के बहुचर्चित पशुपालन घोटाले की पहली एफआइआर करायी थी. लेकिन वह कभी झारखंड में मुख्य सचिव नहीं बन पाये. ऐसा नहीं था कि वह इसकी योग्यता नहीं रखते थे. उनके पास योग्यता भी थी और वरीयता भी, लेकिन उन को दरकिनार कर राजबाला वर्मा को रघुवर दास ने अपनी सरकार में मुख्य सचिव बनाया. दरअसल राजीव गौबा के केंद्र सरकार में सचिव बन जाने के बाद अमित खरे झारखंड के मुख्य सचिव पद के सबसे ताकतवर और योग्य उम्मीदवार माने जा रहे थे. लेकिन तब मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अचानक राजबाला वर्मा को मुख्य सचिव बना दिया. इस पर राजनीतिक गलियारों और नौकरशाही में कई लोगों की भृकुटियां तनी थीं, क्योंकि राजबाला वर्मा की कार्यशैली तब से चर्चा में है, जब से पटना के डीएम रहते हुए उनके आंसू लोगों ने देखे थे. वह आंसू अनायास ही नहीं निकले थे. वह लालू की चारा घोटाले में पहली जेल यात्रा के दुख से उपजा दर्द था, जो राजबाला की आंखों से आंसू बन कर टपका था. बाद के दिनों में राजबाला की पहचान यह बनी कि लोग कहने लगे – “जिसका राज, उसकी बाला”.

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बहरहाल किसी को इसका कारण नहीं पता कि रघुवर दास ने योग्यता और वरीयता दोनों को नजरअंदाज कर राजबाला को मुख्य सचिव क्यों बनाया. लेकिन तब सत्ता के गलियारों में सरगोशियां थीं कि सरयू राय से नजदीकी की वजह से रघुवर दास ने अमित खरे को मुख्य सचिव नहीं बनने दिया. रघुवर दास की सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने जब एक-एक कर सरकार की नाकामियों और गड़बड़ियों की बखिया उधेड़नी शुरू की,तो रघुवर दास की पूरी नौकरशाही ने उनसे अघोषित दूरी बना ली थी, लेकिन अकेले अमित खरे ही थे, जो बेधड़क और बेखटके उनसे मिलते थे. यही बात रघुवर दास को खटकती थी. लिहाजा इसका खामियाजा अमित खरे को भुगतना पड़ा. मुख्य सचिव नहीं बनाये जाने के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया और सूचना प्रसारण सचिव समेत मोदी सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में सचिव का पद संभाला. सरकार ने खरे की योग्यता और काबिलियत को देखते हुए सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के रूप में अटैच कर लिया.

अब खरे की नियुक्ति को लेकर झारखंड में तरह-तरह की चर्चा है. एक भरोसेमंद सूत्र ने बताया कि अमित खरे को पीएमओ में रखवाने की पैरवी पूर्व सीएम रघुवर दास ने हाल की अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान की थी, जब वे गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे. यह खबर इस लिहाज से भी चौंकाने वाली है कि कुछ खबरों में अमित खरे की नियुक्ति को रघुवर दास को चोट के रूप में इंगित किया जा रहा है. अब यह तो रघुवर दास या अमित शाह ही जानते होंगे कि अमित खरे की नियुक्ति किस आधार पर की गयी है, लेकिन अगर रघुवर दास द्वारा उनकी पैरवी किए जाने की सूचना को सही मान लें, तो इसे क्या कहेंगे- प्रायश्चित और अगर यह अफवाह है तो भी इसमें प्रोपेगंडा की बू तो सूंघी ही जा सकती है.

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Nayika

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