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डर के बीच ईसाई समुदाय का देश के नाम खुला पत्र, कहा ‘मॉब लिंचिंग से आहत हैं अल्पसंख्यक’

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Ranchi: ईसाई समुदाय ने देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताते हुए देश के नाम खुला पत्र लिखा है.

ईसाई महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रांची में आयोजित बैठक में देश के नाम एक खुला पत्र जारी कर मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर चिंता जतायी गयी है.

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पत्र में कहा गया है कि ऐसी घटनाओं से देश का अल्पसंख्यक समाज पूरी तरह से आहत हुआ है. इस दौरान ईसाई समाज की वर्तमान स्थिति को लेकर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ.

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महासंघ के सदस्यों ने जिन मुद्दों पर बातचीत की, उससे साफ होता है कि देश के मौजूदा हालत से ईसाई समाज के लोग डरे हुए है. बैठक में महासंघ के 6 से अधिक प्रवक्ताओं ने जोर दिया कि वर्तमान में ईसाई समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है.

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जबकि सभी जानते है कि इस समाज के द्वारा देशभर में 25,000 से अधिक शैक्षणिक संस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं का संचालन हो रहा है.

इन सभी सुविधाओं से ही ईसाई धर्म मानने वाले लोगों का समाज में अपना एक विशिष्ट स्थान हैं. महासंघ की यह बैठक गत सोमवार को रांची में बहुबाजार स्थित एचपीडीसी हॉल परिसर में आयोजित हुई थी.

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बैठक में झारखंड, छतीसगढ़, महाराष्ट्र सहित देशभर के 300 से अधिक ईसाई धर्म मानने वाले लोगों ने भागीदारी की.

मॉब लिंचिंग की घटनाओं से आहत ईसाई और मुस्लिम समाज

बैठक में महासंघ की तरफ से राष्ट्र के नाम एक खुला पत्र भी जारी किया गया. पत्र में लिखा गया है कि गैर संवैधानिक संस्थाओं द्वारा क्रिश्चियन और मुस्लिम समाज के लोगों पर हिंसात्मक घटनाएं लगातार जारी है.

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मॉब लिंचिंग इसी तरह की हाल की घटनाओं को बताता है, जिससे दोनों ही समाज के लोग आहत है. बैठक में महासंघ के सदस्यों ने ईसाई समुदाय के लोगों को अधिकारों को जानने के लिए बाइबिल के साथ संविधान पढ़ने पर भी जोर दिया.

बता दें कि इससे पहले भी धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों का आरक्षण समाप्त करने के सरकार के प्रस्ताव को लेकर राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने विरोध किया था. इसके विरोध में गत 15 जुलाई को रांची के हर इलाके से जुलूस निकाला गया था.

अन्य की तरह ईसाई समुदाय को मिली है सुविधाएं और अधिकार

बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने बताया कि अपने धर्म का प्रचार करने वालों पर सरकार द्वारा झूठा केस दर्ज कराया जाता है. जो कि गलत है.

ईसाई समुदाय के लोगों को संविधान ने वह सभी अधिकार और सुविधाएं दी है, जो देश के अन्य लोगों को मिले हैं. संविधान सभी धर्मों को अपने अधिकारों को मानने, प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है. उन्होंने कहा सेक्यूलर के बहाने देश को एक धार्मिक राष्ट्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है.

प्रभाकर तिर्की ने कहा कि धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता संविधान के तहत सभी को मिली है. जब ईसाई धर्म के बारे में धर्म प्रचारकों द्वारा बताया जाता है, तो कतिपय लोगों द्वारा ऐसे प्रचारकों को टारगेट कर उनपर हमला किया जा रहा है.

ईसाई समुदाय मानने वालों की एक अलग पहचान

बैठक में प्रभाकर तिर्की ने जनजातियों को मिले अधिकारों को लेकर भी अपनी बातों को प्रमुखता से रखा. उन्होंने कहा कि जनजाति समाज के लोगों को भी संविधान ने कई विशेषाधिकार दिये हैं.

लेकिन आज इन अधिकारों का सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है. महासंघ सचिव क्रिश्ती अब्राहम ने कहा कि ईसाई समाज की अपनी एक विशेष पहचान है. यह पहचान उन्हें शैक्षणिक संस्थाओं, हॉस्पिटल्स के सही तरीके से संचालन से मिली है.

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