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अमेरिकी अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल, दुश्मन के घर में घुसकर मारने की क्षमता बढ़ी

एरिजोना स्थित बोइंग प्रोडक्शन फैसिलिटी में रखे गये एक कार्यक्रम में एयर मार्शल एएस बुटोला ने पहला हेलिकॉप्टर स्वीकार किया.

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Washington : अमेरिकी कंपनी बोइंग निर्मित AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया है.  अमेरिका ने शनिवार को अपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर की पहली खेप सौंप दी.  बता दें कि एरिजोना स्थित बोइंग प्रोडक्शन फैसिलिटी में रखे गये एक कार्यक्रम में एयर मार्शल एएस बुटोला ने पहला हेलिकॉप्टर स्वीकार किया.  पहली खेप इसी साल जुलाई में भारत पहुंचाई जायेगी.  भारत ने 2015 में अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से 22 अपाचे खरीदने की डील की थी. 2.5 अरब डॉलर (लगभग 17.5 हजार करोड़ रुपए) के इस डील  में 15 चिनूक हेलिकॉप्टर भी शामिल थे.

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बोइंग के अनुसार अपाचे दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं.  यह खासतौर पर भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाये हैं.  कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता की वजह से यह पहाड़ी क्षेत्रों में छिपकर वार करने में सक्षम हैं.  भारत अपाचे का इस्तेमाल करने वाला 14वां देश होगा.  इससे वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा.  इसी साल फरवरी में अमेरिका से खरीदे गये चिनूक हेलिकॉप्टर की पहली खेप वायुसेना के बेड़े में शामिल हो चुकी है.  चार चिनूक हेलिकॉप्टर गुजरात में कच्छ के मुंद्रा एयरपोर्ट पहुंचे थे.

अमेरिकी कंपनी बोइंग निर्मित AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर माने जाते हैं.   इस हेलिकॉप्टर के शामिल होने से भारत की दुश्मन के घर में घुसकर मार करने की क्षमता और बढ़ी है. अपाचे पहला ऐसा हेलिकॉप्टर है जो भारतीय सेना में विशुद्ध रूप से हमले करने का काम करेगा.  भारतीय सेना रूस निर्मित एमआई-35 का प्रयोग वर्षों से कर रही है, लेकिन यह अब रिटायरमेंट के कगार पर है. अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दुशमन की किलेबंदी को भेदकर और उसकी सीमा में घुसकर हमला करने में सक्षम है.

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अपाचे युद्ध के समय गेम चेंजर साबित होगा

इससे पीओके में आतंकी ठिकानों को असानी से तबाह किया जा सकेगा.  रक्षा वि‍श्लेषकों का मानना है कि अपाचे युद्ध के समय गेम चेंजर की भूमिका निभा सकता है.  अमेरिका ने अपने इस अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर को पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों से लोहा लेने में इस्तेमाल किया है.  इजरायल भी लेबनान और गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों में इसी अटैक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करता रहा है.

इस हेलिकॉप्टर को अमेरिकी सेना के अडवांस्ड अटैक हेलिकॉप्टर प्रोग्राम के लिए बनाया गया था.  इसने पहली उड़ान साल 1975 में भरी, लेकिन इसे अमेरिकी सेना में साल 1986 में शामिल किया गया.
अमेरिका के अलावा इजरायल, इजिप्ट और नीदरलैंड की सेनाएं भी इस अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती हैं.

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