न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

अमेरिका ने भारत को नाटो देशों जैसा दर्जा दिया, पाकिस्तान को लेकर आईएमएफ को चेताया

अमेरिका ने सोमवार को भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 (एसटीए- 1) देश का दर्जा देकर भारत को हाई-टेक प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए निर्यात नियंत्रण में रियायत दे दी.

682

 NewDelhi : अमेरिका ने सोमवार को भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 (एसटीए- 1) देश का दर्जा देकर भारत को हाई-टेक प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए निर्यात नियंत्रण में रियायत दे दी. बता दें कि भारत एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है, जिसे इस सूची में स्थान मिला है.  इससे पूर्व 2016 में भारत को अमेरिका के प्रमुख रक्षा सहयोगी के रूप में मान्यता मिलने के बाद एसटीए-1 का दर्जा दिया गया है. एक तरफ अमेरिका भारत को सामरिक साझेदार का दर्जा दे रहा है, दूसरी ओर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है.  खबर आयी है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को पाकिस्तान को राहत पैकेज देने को लेकर आगाह किया है.

यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-प्रशांत बिजनस फोरम के पहले आयोजन में रॉस ने कहा कि एसटीए- 1 दर्जा भारत-अमेरिका के सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को मान्यता देता है. यह दर्जा वाणिज्य नियंत्रण सूची (सीसीएल) में निर्दिष्ट वस्तुओं के निर्यात, पुन: निर्यात और हस्तांतरण की अनुमति देता है. वर्तमान में इस सूची में 36 देश हैं जिनमें ज्यादातर नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) में शामिल देश हैं. भारत इसमें शामिल होनेवाला एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है. अन्य एशियाई देशों में जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं.

इसे भी पढ़ेंः असम समझौते पर शाह का कांग्रेस पर हमला, कहा-हमने दिखाई हिम्मत, विपक्ष का हंगामा   

 भारत को मिला नया दर्जा अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स को लाभ पहुंचायेगा

विलबर रॉस ने कहा कि एसटीए- 1 से भारत को सुरक्षा एवं दूसरी हाई-टेक प्रॉडक्ट्स का और बड़ा सप्लाइ चेन हासिल होगा जिससे विभिन्न अमेरिकी तंत्रों के साथ उसकी गतिवधियां बढ़ेंगी, दोनों देशों के सिस्टम के बीच पारस्परिकता की वृद्धि होगी और लाइसेंसों की स्वीकृति में समय और संसाधनों की बचत होगी. अमेरिकी कंपनियां भारत के उच्च तकनीक एवं सैन्य साजो-सामान बनानेवाली कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा रेंज के प्रॉडक्ट्स निर्यात कर सकेंगी. भारत को मिला नया दर्जा अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स को लाभ पहुंचायेगा.

अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरणा ने कहा कि इससे यह तो जाहिर होता ही है कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ रिश्ते में कितना भरोसा रखते हैं, इसके साथ ही एक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की क्षमताओं का भी प्रदर्शन होता है. सरना ने कहा, यह न केवल रिश्ते पर विश्वास का प्रतीक है, बल्कि एक अर्थव्यवस्था और सामरिक साझेदार के रूप में भारत की क्षमता का भी इजहार है.

इसे भी पढ़ेंःजज लोया मौत मामले में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका स्वीकार

अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार गिर रही है

अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार गिर रही है. बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष को पाकिस्तान को किसी संभावित राहत पैकेज के प्रति आगाह किया है. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने सीएनबीसी से साक्षात्कार में कहा कि कोई गलती नहीं करें. आईएमएफ जो करेगा उस पर हमारी निगाह है. खबरों के अनुसार पाकिस्तान आईएमएफ से 12 अरब डॉलर का पैकेज चाहता है.

हालांकि आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि उसे अभी तक पाकिस्तान से इस तरह का आग्रह नहीं मिला है इससे पहले, फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) भी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट यानी संदिग्धों की सूची में डाल चुका है. आतंकी संगठनों को हो रही आर्थिक फंडिंग को रोकने में कामयाब न रहने की वजह से पाकिस्तान के खिलाफ यह ऐक्शन लिया गया है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: