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स्वंयसेवी संस्थानों को रेफरल ट्रांसपोर्टेशन पर दिये गये एंबुलेंस का फिर से मंगाया जायेगा आवेदन

सभी जिलों में स्वंयसेवी संस्थानों को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत दिया गया था एंबुलेंस

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Ranchi: झारखंड सरकार की ओर से स्वंयसेवी संस्थानों को रेफरल ट्रांसपोर्टेशन के लिए दिये गये एंबुलेंस सेवा का आवेदन फिर से मंगाया जायेगा. राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत 186 सीएचसी तक मरीजों को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की गयी थी. इसके लिए 146 एंबुलेंस विकास भारती, सिटिजंस फाउंडेशन समेत अन्य एनजीओ को दिया गया था. योजना के तहत एंबुलेंस की सेवा के लिए चिकित्सकों के अलावा कंपाउंडर, प्रशिक्षित नर्स और सहिया को प्रतिनियुक्त किया गया था.

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2012-13 में शुरू की गयी योजना के सफल नहीं होने पर, अब स्वास्थ्य विभाग की तरफ से री-टेंडर कर फ्रेश आवेदन मंगाने का निर्णय लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि, सुदूर ग्रामीण इलाकों तक चिकित्सकों को 25 से 30 हजार रुपये के मानदेय पर एंबुलेंस में बैठाना मुनासिब नहीं हो रहा था. चिकित्सक भी एंबुलेंस सेवा में अपना योगदान देने से जरूरी निजी क्लिनिक अथवा अस्पतालों में चिकित्सा सेवा को अधिक तवज्जो देते थे. इसके अलावा एंबुलेंस का रख-रखाव भी काफी महंगा था.

एक एंबुलेंस सेवा के लिए सरकार की तरफ से 1.25 लाख रुपये से अधिक का मिलता था खर्च

योजना के तहत एक-एक एंबुलेंस पर सरकार स्वंयसेवी संस्थानों को 1.25 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करती थी. चिकित्सकों को सप्ताह में चार दिन के लिए अपनी ड्यूटी देना जरूरी किया गया था. इसके अलावा एएनएम तथा सहिया के लिए भी एक तय रकम निर्धारित की गयी थी. एंबुलेंस सेवा के लिए स्वंयसेवी संस्थानों को टेलीफोन बिल, टेलीफोन कनेक्शन, कॉल सेंटर की सुविधा, प्रचार-प्रसार करने के लिए भी राशि का भुगतान करना पड़ता था. एक-एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीजों को सेवा देने के लिए 3.86 लाख का भुगतान भी सरकार की तरफ से किया जाता था. सलाना एक-एक एंबुलेंस पर सरकार 15 लाख से अधिक का खर्च कर रही थी.

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सरकार के 108 सेवा शुरू करने से एंबुलेंस सेवा पर पड़ा प्रभाव

राज्य सरकार की तरफ से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से 108 एंबुलेंस सेवा शुरू करने की वजह से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की पुरानी योजना पर खासा फर्क पड़ा है. सरकार 256 एंबुलेंस राज्य भर में 108 के नाम पर संचालित कर रही है. इससे सरकारी अस्पतालों तक गंभीर बीमारी के मरीजों को पहुंचाने का काम किया जाता है. राज्य के 17वें स्थापना दिवस समारोह के दिन 108 योजना की शुरुआत सरकार की तरफ से की गयी थी.

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