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झारखंड के सभी शहरों में लगेगा एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, थमेगा प्रदूषण

Special Correspondent

Ranchi : झारखंड के शहरी क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है. मिलियन प्लस सिटी रांची, जमशेदपुर व धनबाद सहित अन्य शहरी निकायों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नगर विकास विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है. प्रदूषण लेवर को पीएम 10 से नीचे लाने व नंबर ऑफ गुड डे को साकार करने के लिए वन भवन डोरंडा के पास स्थापित एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनटरिंग स्टेशन (सीएएमक्यूएमएस) की तर्ज पर सभी शहरों में स्टेशन स्थापित करने की योजना है.

रांची में कई स्टेशन लगाये जायेंगे. नगर निकायों,प्रदूषण बोर्ड व अन्य विभागों के समन्वय से शहरों को प्रदूषण मुक्त करने का काम किया जायेगा. शहर के प्रदूषित वातावरण में धूल कणों का पता लगाने और पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली जहरीली गैसों का भी पता इस स्टेशन के जरिये लगाया जा सकेगा. सूडा निदेशक अमित कुमार ने बताया कि इसके लगने से शहर के प्रदूषित वातावरण में धूल कणों का पता लगाया जा सकेगा, जहरीली गैस की भी जानकारी मिलेगी. इस स्टेशन में विशेष उपकरण लगाये जाते हैं. 15वें वित्त आयोग की राशि से सभी निकायों को कहा गया है कि वे एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए योजना बनाकर प्रस्ताव भेजें.

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उन्होंने बताया कि इसमें लगे उपकरण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले छह हानिकारक कारकों को भांप कर समय से पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाने में कारगर साबित होंगे. इन स्टेशनों में कई तरह के सेंसर लगे होते हैं जो शहर की वायु में प्रदूषणों के मानकों की रियल टाइम सूचना देंगे. वातावरण में हानिकारक गैसों की मात्रा अधिक होने पर सेंसर सूचना को एकत्र कर कंट्रेल रूम में भेजता है. वायु में कार्बन डाइऑक्साइड,सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन की अधिकता होते ही ये कंट्रोल रूम को डाटा भेजेगा.

जिससे सूचना के अनुसार प्रशासन द्वारा समय पर बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाये जा सकेंगे. इन सेंसर के जरिये ध्वनि प्रदूषण, तापमान,आद्रता और अल्ट्रावॉयलेट किरणों के साथ ही बारिश का भी पता लगाया जा सकता है. नैनो तकनीक पर आधारित जर्मन डस्ट सेंसर महीन धूल कणों के मात्रा का सही माप करने में भी सक्षम है. जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक भीड़-भाड़ और औद्योगिक स्थानों को चिन्हित कर उन इलाकों में एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनटरिंग स्टेशन स्थापित किया जायेगा.

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इंडस्ट्रियल एरिया, आउटर इलाकों में भी यह स्टेशन स्थापित करने की योजना है. वहां विशेषज्ञों की टीम इस डाटा पर निगरानी बनाये रखती है. अगर कोई डाटा मानक के अनुकूल नहीं होता है तो तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना भेजी जाती है. जिसके बाद अधिकारी प्रदूषण पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए कार्य करते हैं. अधिकारियों द्वारा उस इलाके का ट्रैफिक डाइवर्ट करने के साथ पानी का छिड़काव,सड़कों की सफाई जैसे उपाय किए जाते हैं. उस इलाकों के निर्माण कार्य और औद्योगिक इकाई पर भी नियंत्रण किया जाता है.

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