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एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में दो नक्‍सलियों को फांसी की सजा

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Dumka : दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने बुधवार को तत्कालीन पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने भादवि की धारा 307, 396,302 एवं आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनायी.

न्यायालय ने जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि एक आईपीएस सहित छह जवानों की हत्या आपने की. ऐसे में आपको बाहर छोड़ना समाज के लिए घातक है. वहीं अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा सहित अर्थदंड की सजा सुनायी. इस केस में गिरफ्तार पांच अभियुक्तों- वकील हेम्ब्रम, लोबीन मुर्मू, सत्तन बेसरा, मारबेल मुर्मू और मारबेल मुर्मू-2 को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने 6 सितंबर को बरी कर दिया था.

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हत्याकांड में कुल 31 गवाहों का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया

हत्‍याकांड को लेकर भादवि की धारा 147, 148, 149, 326, 307, 379, 302, 427, 27 शस्त्र अधिनियम और 17 सीएलए के तहत प्रवीर दा, ताला दा, दाउद, जोसेफ और 25 से 30 अज्ञात के खिलाफ कांड सं. 55/13 के तहत काठीकुंड थाने में मामला दर्ज किया गया था.

इस केस में सात अभियुक्तों का ट्रायल चला जिनमें प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू, वकील हेम्ब्रम, मारबेल मुर्मू, मारबेल मुर्मू-2, सत्तन बेसरा, सनातन बास्की उर्फ ताला दा शामिल हैं. हत्याकांड में कुल 31 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किये गये. केस में बुधवार को पहले सजा के बिंदु पर बहस हुई जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजा खान और केएन गोस्वामी ने कम सजा देने की अपील की. जबकि अभियोजन की ओर से एपीपी ने इसे रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर केस बताते हुए कुछ केसों का हवाला देते हुए फांसी की सजा देने को न्यायोचित बताया. कोर्ट ने कहा कि जब एक आइपीएस अधिकारी की हत्या की गयी, तब आम आदमी की सुरक्षा कैसे होगी. इसलिए दोनों को फांसी की सजा सुनाई जाती है.

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2 जुलाई 2013 की है घटना

ज्ञात हो कि 2 जुलाई 2013 को दुमका में डीआइजी कार्यालय में बैठक के बाद एसपी अमरजीत बलिहार दो वाहनों से पाकुड़ लौट रहे थे. तभी काठीकुंड के आमतल्ला के पास पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले पर घात लगाये नक्सलियों ने एके 47, इंसास रायफल और एएसएलआर से ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी. इसमें एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. नक्सली हमले में शहीद पुलिस जवान मनोज हेम्ब्रम दुमका जिले के गुहियाजोरी गांव, राजीव कुमार शर्मा और संतोष मंडल साहेबगंज जिला, अशोक कुमार श्रीवास्तव बिहार के बक्सर जिला और चंदन थापा बिहार के कटिहार जिले के रहनेवाले थे. नक्सली हमले में एसपी समेत कुल 6 जवान शहीद हुए थे और दो एके 47 रायफल, चार इंसास रायफल के अलावा दो पिस्टल और 647 गोलियां नक्सली अपने साथ लेते गये थे.

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2003 बैच के आइपीएस थे बलिहार

अमरजीत बलिहार 2003 बैच के आइपीएस अधिकारी थे. वे झारखंड आर्म्ड पुलिस के कमांडेंट रह चुके थे. उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ काफी कड़े कदम उठाये थे. इसी वजह से पाकुड़ में पोस्टिंग के समय से ही वे नक्सलियों के निशाने पर थे.

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जहानाबाद में हुई थी पहली पोस्टिंग

14 अक्‍टूबर 1960 को जन्‍मे अमरजीत ने 1983 में एमए किया. साल 1986 में उन्‍होंने बीपीएससी परीक्षा पास की. बतौर डीएसपी पहली पोस्टिंग जहानाबाद में हुई. इसके बाद मुंगेर, खूंटी, जहानाबाद, पटना, राजगीर, हवेली खडग़पुर, लातेहार, चक्रधरपुर और फिर रांची में पोस्टिंग हुई. 2003 में आइपीएस हुए और जैप वन में डिप्टी कमांडेंट बने. मई 2013 में उन्हें पाकुड़ का एसपी बनाया गया था.

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चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था में नक्सलियों की न्यायालय में हुई पेशी

सुबह से ही न्यायालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही. न्यायालय मुख्य गेट पर एएसआइ बीके चौधरी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात दिखे. दोषी नक्सलियों की नगर थाना पीसीआर वैन एवं टाइगर मोबाइल पुलिस बल की सुरक्षा में कोर्ट में पेशी हुई.

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हाइकोर्ट में अपील करेगी प्रवीर की पत्नी

प्रवीर की पत्नी नमिता राय ने न्यायालय के फैसले पर असंतोष जाहिर करते हुए हाइकोर्ट जाने की बात कही.नमिता ने बताया कि न्यायालय पर पूरा भरोसा था, फैसले से आस टूट गई. हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चैलेज करेंगी.

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