Opinion

चीन से तनातनी के बीच उसके मोदी व गुजरात कनेक्शन को भी जान लीजिये, आत्मनिर्भर भारत!

 Girish Malviya

चीन से भारत की तनातनी साफ दिख रही है. इसलिए अब सिर्फ चीनी झालरों का विरोध करने से बात बनने वाली नहीं है. अब हमें कुछ ठोस करना होगा. हालांकि ये बात अलग है कि चीनी सामान के बहिष्कार की बात में चीन के सबसे बड़े ब्राण्ड के स्मार्टफोन से ही लिख रहा हूं.

क्या आप जानते हैं कि चीन ने भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट किया हुआ है? वह राज्य है गुजरात. जब से मोदी जी मुख्यमंत्री बने थे, तभी से चीन के इन्वेस्टमेंट का सिलसिला गुजरात में शुरू हुआ. बतौर मुख्यमंत्री उन्हें अमेरिका ने वेलकम नहीं किया. लेकिन चीन ने ससम्मान उन्हें बुलाया.

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उन्होंने चीन की ही यात्राएं की. इसलिए ही प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने जिंगपिंग को भारत बुलाकर अहमदाबाद में झूला झुलवा दिया. आज अधिकतर चीनी कंपनियों के रीजनल हेड ऑफिस अहमदाबाद में हैं.

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2011 में भारत में विदेशी निवेश करने वाले मुल्कों में चीन का स्थान 35 वां था. 2014 में 28 वां हो गया. अब तक नया डाटा नहीं आया है. लेकिन संभवतः वह टॉप 10 में आ गया होगा.

2016-17 में चीन की कंपनी चाइना रेलवे रोलिंग स्टॉक को नागपुर मेट्रो के लिए 851 करोड़ का ठेका दिया गया. चाइना रोलिंग स्टाक चीन की दो सरकारी कंपनियों के विलय से बनी है. सरदार पटेल की मूर्ति भी चाइना से बनवायी गयी. जिसका अनावरण खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.

आज की स्थिति यह है कि FICCI की एक रिपोर्ट बताती है ऑटोमोबाइल सेक्टर में 40%, नया निवेश चीन से आया है. भारत का ऑटोमोबाइल मार्केट कुछ ही दिनों में चीन शरणम गच्छामि होने वाला है. इसका संकेत MG हेक्टर की बढ़ती बुकिंग से मिल जाता है. जो मूलतः चाइनीज कम्पनी ही है.

इसकी नयी जितनी भी फैक्ट्री है, वह अधिकतर गुजरात में ही लगी है. इसके अलावा धातु उद्योग में 17%, पावर सेक्टर में 7%, कंस्ट्रक्शन व रियल एस्टेट में 5% और सेवाओं के सेक्टर में 4% निवेश के चलते इन क्षेत्रों में चीनी निवेश सबसे ज़्यादा है. उपभोक्ता उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में चीन का निवेश भारत में बढ़ रहा है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी एक ख़बर के मुताबिक़, ब्रूकिंग्स इंडिया द्वारा प्रकाशित एक पेपर के अनुसार, भारत में चीन द्वारा मौजूदा वक्त में प्लांड इन्वेस्टमेंट कम से कम 26 बिलियन डॉलर है. 1 बिलियन डॉलर, 7655 करोड़ रुपया होता है. चीन की कंपनियों ने ज्यादातर भारतीय दवा, टेक्नोलॉजी, टेक स्टार्टअप कंपनियों में इन्वेस्ट किया हुआ है. करीब 15 बिलियन डॉलर का निवेश चीन की कंपनियों द्वारा निवेश योजनाओं में है.

चीन की कंपनियों ने स्नैपडील, ओला, पेटीएम, बिग बास्केट, हाइक, स्विगी, ज़ोमेटो जैसी कम्पनियों में अच्छा-ख़ासा पैसा लगा रखा है.

जिस देश में चीन इतना इन्वेस्टमेंट कर चुका है. उस देश से युद्ध करेगा, इसकी उम्मीद कम है. लेकिन हां छोटी मोटी झड़पें जरूर हो सकती हैं. वैसे चाइना द्वारा इतना इन्वेस्टमेंट करवा देने को भी कुछ लोग मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक जरूर कह सकते हैं. हालांकि वह अब हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए कह रहे हैं.

डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.

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