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हिंदी के साथ विदेशी भाषाओं में भी अनूदित हो रही हैं आदिवासी लेखकों की किताबें

कई विश्वविद्यालयों में हो रही है पढ़ाई

Praveen munda

Ranchi : साहित्यकार महादेव टोप्पो इन दिनों अपने नये उपन्यास पर काम कर रहे हैं. यह उपन्यास एक ऐसे आदिवासी युवा पर केंद्रित है जो अपनी पहचान की लड़ाई से जूझ रहा है. उपन्यास को तकरीबन आधा लिखा जा चुका है. महादेव टोप्पो इसे फरवरी तक पूरा करने की उम्मीद करते हैं. बता दें कि महादेव टोप्पो रिटायर्ड बैंककर्मी है.

नौकरी के समय से ही उन्होंने पत्र पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया था. उनकी कविता संग्रह जंगल पहाड़ के पाठ का अंग्रेजी और मराठी में अनुवाद हुआ है. इसे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक में कोर्स में भी शामिल किया गया है.

जसिंता केरकेट्टा भी एक युवा कवयित्री हैं. हाल के समय में उन्होंने जितना नाम कमाया है उतना शायद किसी और ने नहीं. उसकी कविता संग्रह का जर्मन समेत कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है. और इनकी कविताएं भी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है.

आदिवासी समुदाय से निकल रहे हैं लेखक

आदिवासी समुदाय में अब कई ऐसे लेखक हैं जिनकी कहानियां, कविताएं, उपन्यास और लेखन की अन्य विधाएं साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं. गुमला के पठारों में रहनेवाली सुषमा असुर आदिम जनजाति समुदाय की इकलौती कवयित्री हैं. उनकी रचनाओं में सरलता और सहजता है. मंगल सिंह मुंडा ने कुछ सालों पूर्व उपन्यास छैला संदू लिखा था. दशम जलप्रपात और उसके पास के गांव में रहनेवाले एक आदिवासी युवा की प्रेम कहानी. दशम प्रपात से जुड़ी एक दंत कथा.

कई आदिवासी लेखक भी हैं जो अंग्रेजी में लिख रहे हैं. इनमें पहला नाम है हांसदा सौवेंद्र शेखर है. इनका उपन्यास मिस्टियस एलीमेंट ऑफ रूपी बास्के काफी चर्चा में रहा है. इन्होंने बच्चों के लिए काफी लेखन किया है. कथाकार समीर भगत इस फेहरिस्त में एक और नाम है जो अंग्रेजी में लिखते हैं. उनकी पुस्तक है सैलवेजिंग आदिदीप.

आदिवासी समुदाय की किताबों की भी खासी चर्चा

ये सभी डॉ रोज केरकेट्टा, उनकी बेटी वंदना टेटे की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. वैसे आजादी के पहले ही अग्रेंजी में कहानी लिखने वाली एक एक झारखंडी कथाकार का जिक्र मिलता है. वंदना टेटे और अखड़ा की उनकी टीम ने उनकी कहानियों के संग्रह को खोज निकाला है.

ग्लैडसन डुंगडुंग, सुनील मिंज भी ऐसे ही लेखक हैं. इन सभी ने आदिवासी समाज को ही नहीं बल्कि साहित्य की दुनिया को अपने लेखन से समृद्ध किया है. इन्होंने नये लेखकों के लिए रास्ता खोल दिया है.

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