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राजधानी में अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के सभी मुकदमे हुए समाप्त

राज्यभर में चल रहे थे 1800 से अधिक मुकदमे

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Ranchi : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट (भूमि-अधिकतम सीमा और विनियमन)-1976 को समाप्त कर राज्य भर में चल रहे एक हजार से अधिक मुकदमों को समाप्त कर दिया गया है. इस एक्ट की वजह से रांची, जमशेदपुर, धनबाद में 18 सौ से अधिक मुकदमे विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन थे. सरकार के फैसले से राजधानी रांची में ही 800 से अधिक वैसे मामले, जिनकी जमीन अरबन लैंड सीलिंग एक्ट की वजह से फंसी हुई थी. उस पर लगी रोक समाप्त हो गयी. लैंड सीलिंग एक्ट 1976 को निरस्त किये जाने से राजधानी में ही कई रैयतों को फायदा हुआ है.

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जायसवाल परिवार, रश्मि सरावगी, राजकुमारी देवी सरावगी, अंजना सरावगी, जया राय, मीरा राय, मुंजाल परिवार और अन्य रैयतों की जमीन सीलिंग एक्ट के प्रभाव से मुक्त हो गयी. अब अधिकतर जमीनों में रिहायशी इमारतों का निर्माण कार्य हो रहा है और शहर का अनपेक्षित विकास भी हो रहा है.

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पंजाब, हरियाणा विधानसभा के फैसले के अनुरूप लिया गया निर्णय

झारखंड सरकार ने अर्बन सीलिंग एक्ट को निरस्त करने के मामले में पंजाब और हरियाणा विधानसभा के पारित फैसले के अनुरूप निर्णय लिया है. संविधान की धारा 252 (2) के अधीन हरियाणा और पंजाब विधान मंडल के संकल्प संख्या-15 का हवाला दिया गया है. इसके अंतर्गत झारखंड में भी शहरी विकास को देखते हुए इस कानून को निरस्त कर दिया गया है. झारखंड के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से इस संबंध में 24 जनवरी 2011 को संकल्प जारी कर गजट भी प्रकाशित किया गया है.

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झारखंड विधानसभा की तरफ से नगर भूमि (अधिकतम सीमा और विनियमन) निरसन अधिनियम, 1999 को अंगीकृत कर लिया गया है. इसकी वजह से पूर्व के अधिनियम जो 1976 में लागू किया गया था, उसे समाप्त कर दिया गया है. इसमें सरकार की तरफ से तत्कालीन राज्यपाल की भी सहमति ली गयी थी.

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