न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

धान क्रय केंद्र की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा ने शुरू किया अनशन

24

Palamu: न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अविलंब धान खरीददारी की गारंटी, क्रेय केंद्र को साल भर खोल, किसानों को लाभ पहुंचाने जैसी मांगो को लेकर पांकी(पलामू) में किसानों की दो दिवसीय अनशन गुरूवार को शुरू हुई. अनशन के दौरान लोगों ने कहा कि एक तरफ देश की सरकार गगन चुंभी मूर्तियां बनाने में हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है वहीं दूसरी तरफ देश का अन्नदाता किसान, कर्ज में बोझ में दबा हुआ, कभी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं . जब कुछ नहीं होते दिखता तो मौत को गले लगाने को मजबूर हैं. 04 अक्टूबर 2018 को पांकी (पलामू) प्रखंड कार्यालय के समक्ष सैंकड़ों किसानों ने, धान क्रय केंद्र समय से खोलने व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदारी की गारंटी करने के मांग पर, एकदिवसीय धरना दिया था. किसानों का कहना था कि‍ धान क्रय केंद्र मार्च-अप्रैल के महीने में खुलते हैं,  हमें नये फसल करने के लिए और अन्य कामों के लिए, कटनी के बाद तत्काल पैसे के आवश्यकता होती है, इसलिए हमलोग धान स्थानीय व्यापारियों को औने पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं. ऐसे में अगर धान का क्रय केंद्र धान की कटनी के समय खुले तो किसानों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा मिलेगा.

इसे भी पढ़ें: मिट्टी के दीयों से सजा बाजार, जगह-जगह लगा है दिवाली बाजार

नहीं मिल रहा समर्थन मूल्‍य का पूरा लाभ

धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1900(1750₹ केंद्र + 150₹ राज्य) रुपये प्रति क्विंटल तय है जो स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के आधार पर पहले ही कम है.  इस साल बारिश कम होने की वजह से हमारे क्षेत्र के किसान पहले से मौसम की मार झेल रहे हैं, उन्हें फसल पैदा होने के बाद बाजार की मार ना झेलनी पड़े. उसके लिए सरकार को अविलम्ब प्रत्येक पंचायत में धान/फसल क्रय केंद्र खोल, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीददारी की गारंटी करनी चाहिये. पांकी के किसानों को अभी तक साल 2015-2016 व 2016-2017 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना द्वारा कराये गये बीमा का भुगतान भी नहीं हुआ है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: