Opinion

‘सब मिले हुए हैं जी’ यानी #Indiabulls

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Girish Malviya

इंडिया बुल्स के मालिक हैं समीर गहलोत, समीर के पिता बलवान सिंह गहलोत एक्स आर्मी मैन हैं और अब एक खनन कारोबार से जुड़े बताये जाते हैं. समीर गहलोत की माताजी हैं बीजेपी की नेता कृष्णा गहलोत, जो इस वक़्त हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की अध्यक्ष हैं. कृष्णा गहलोत का हरियाणा बीजेपी में बहुत रुतबा है.

नरेंद्र गहलोत समीर गहलोत के भाई हैं जो दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएट हैं. नरेंद्र गहलोत 25 जुलाई, 2012 को इंडिया बुल्स रियल इस्टेट लिमिटेड के एमडी बने. वो इंडिया बुल्स इन्श्योरेंस एजेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के भी डायरेक्टर हैं.नरेन्द्र गहलोत की शादी हुई है ज्योति मिर्धा से जो नागौर में कांग्रेस की कदावर नेता हैं. एक बार सांसद भी रही हैं वह. पांच बार सांसद रहे नाथूराम मिर्धा की पोती हैं.

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गहलोत और हुड्डा परिवार के बीच सीधा संबंध

ज्योति मिर्धा की बहन हेमश्वेता मिर्धा की शादी दीपेंद्र हुड्डा से हुई है जो पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के बेटे हैं. ऐसे में बीजेपी के गहलोत परिवार और हुड्डा के बीच सीधा संबंध है. अमेरिका में पढ़ाई करनेवाली श्वेता ने कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम किया है. इनमें इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन, इंडिया बुल्स और रॉबर्ट हाफ इंटरनेशनल जैसी कंपनियां शामिल हैं.

यानी पूरा परिवार ही राजनीति से जुड़ा हुआ है, क्या बीजेपी क्या कांग्रेस सब एक ही है. पिछले कुछ महीनों में इंडिया बुल्स में गड़बड़ी के कई आरोप लगे हैं. इस ग्रुप पर लगभग 87 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है.

दिल्ली हाइकोर्ट ने मांगा है जवाब

दिल्ली हाइकोर्ट ने इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस (IBHFL) से जुड़े फंड हेराफेरी मामले में कल केंद्र सरकार व आरबीआइ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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IBHFL के खिलाफ़ हाइकोर्ट में जो याचिका दायर की गयी है. उसमें कहा गया है कि इस कम्पनी ने नियमों का उल्लंघन कर कई अनियमितताएं की हैं.

दायर याचिका में कहा गया है कि बीते कई वर्षों से आइबीएचएफएल ने विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों से मोटे कर्ज लिये.

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इस तरह उसने जनता का पैसा और आइबीएचएफएल के अंशधारकों व निवेशकों का पैसा बड़े कॉरपोरेट समूहों के स्वामित्ववाली कंपनियों को संदिग्ध कर्ज के रूप में देकर उसे दांव पर लगाया गया.

इस कर्ज की हेराफेरी करके इंडिया बुल्स के प्रवर्तकों की स्वामित्ववाली कंपनियों के खाते में डाल दिया गया. इसका मकसद उनकी निजी संपत्ति को बढ़ाना था.

सुब्रमण्‍यम स्वामी लंबे समय से मुखर

इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस और उसके सहयोगियों पर वित्तीय घोटाले मामले को लेकर सुब्रमण्‍यम स्वामी लंबे समय से मुखर हैं.

बीते दिनों सुब्रमण्‍यम स्वामी ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया था. इस लेटर में दावा किया गया कि इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस जानबूझ कर वित्तीय पतन और दिवालियापन की तरफ बढ़ रही है, जो रियल एस्टेट, बैंकिंग, शेयर बाजार आदि में भ्रष्टाचार का मसला है.

इसमें 1 लाख करोड़ रुपये की चपत निवेशकों को और राष्ट्रीय हाउसिंग फाइनेंस बोर्ड को लगी है. सुब्रमण्‍यम स्वामी के मुताबिक इंडिया बुल्स ने 100 से अधिक शेल कंपनियां बनायीं, जिन्होंने NHB से कर्ज लिया.

फिर इस कर्ज को महाराष्ट्र, दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु और चेन्नई की कई रीयल एस्टेट कंपनियों को दे दिया गया. इंडिया बुल्स ने इन आरोपों को गलत करार दिया था और कहा है कि इंडिया बुल्स की प्रतिष्ठा को खराब करने और लक्ष्मी विलास बैंक के साथ उसके विलय में बाधा उत्पन्न करने के लिए ये आरोप लगाये गये हैं.

लेकिन अब तो लक्ष्मी विलास बैंक में भी 790 करोड़ का बड़ा घोटाला सामने आया है. उसके MD ने पिछले महीने ही इस्तीफा दे दिया है. इससे भी इस सौदे पर कई सवाल खड़े हो जाते हैं.

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