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एलियंस सुपर इंटेलिजेंट, धरती पर आये हों, लेकिन हमें पता न चला हो…

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Washington : एलियंस सुपर इंटेलिजेंट हैं. हो सकता है कि वे आकार में अति सूक्ष्म हों. नासा के कंप्यूटर साइंटिस्ट ने अनुमान जताया है कि हो सकता है कि एलियंस धरती पर आये  हों लेकिन हमें पता न चला हो.  नासा के कंप्यूटर साइंटिस्ट और प्रोफेसर सिल्वानो पी कोलंबो ने अपने रिसर्च पेपर में यह दावा किया है.  सिल्वानो का तर्क है कि हो सकता है कि एलियंस की संरचना परंपरागत कार्बन संरचना पर आधारित न हो, इसलिए हमें इनका पता न चल पाया हो.  सिल्वानो ने कहा कि एलियंस संभवतः इंसानों की कल्पना से बिल्कुल अलग दिखते होंगे.  इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार सिल्वानो ने अपने रिसर्च पेपर में लिखा है कि ऐसा जरूरी नहीं कि हम जिन्हें ढूंढ रहे हैं या जो हमें ढूंढ रहे हैं, वे हमारी तरह कार्बन आधारित हों.  सिल्वानो ने वैज्ञानिकों से कहा है कि एलियंस को लेकर हमें अपनी धारणाओं पर फिर से काम करने की जरूरत है.  सिल्वानो ने एलियंस को सुपरइंटेलिजेंट बताते हुए कहा है कि हो सकता कि वे आकार में अति सूक्ष्म हों.  सिल्वानो ने वैज्ञानिकों को नये तरीके की अवधारणाओं और तकनीक पर काम करने की सलाह दी है.

मानवीय सभ्यता में तकनीकी विकास का इतिहास 10 हजारसाल पुराना

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  कहा कि मानवीय सभ्यता में तकनीकी विकास का इतिहास महज 10 हजार साल पुराना है.  इसके अलावा साइंटिफिक मेथडलॉजी में पिछले 500सालों में ही विकास हुआ है. ऐसे में संभव है कि एलियंस मसे टेक्नॉलजी मेंकाफी आगे हों.  उन्होंने लिखा, हमारी सभ्यता लगभग 10 हजार साल पहले शुरू हुई थी और हमने वैज्ञानिक तौर पर उपलब्धियां पिछले 500 सालमें ही देखी हैं.  इससे हम अनुमान लगा सकतेहैं कि हजार सालों के तकनीकी विकास की भविष्यवाणी करने में हमें परेशानी हो सकतीहै. जाने-माने वैज्ञानिक और अंतरिक्ष विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने भी एलियन केअस्तित्व को माना था.  कई बार सौरमंडल में हजारों करोड़ किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल टकराने से उन्हें आशंका थी कि हम अकेले नहीं हैं.  

इसके अलावा स्टीफन लगातार एलियंस से बात करने की कोशिश कर रहे थे.  हालांकि, उनका यह भी मानना था कि एलियंस को ढूंढने के चक्कर में हम अपने लिए ही परेशानी खड़ी कर लेंगे.  उनका मानना था कि सन् 2100 केखत्म होते-होते धरती पर इंसानों के सामने कई दिक्कतें आने लगेंगी.  धरती पर जीवन मुश्किल हो जायेगा, लिहाजा हमें दूसरे ग्रहों पर इंसानी कॉलोनियां बनाने के काम में जुट जाना चाहिए.

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